काव्य भाषा : हे प्रभु जगन्नाथ -ऋतु राज वर्षा रांची

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हे प्रभु जगन्नाथ

हे प्रभु जगन्नाथ,
करें सब पर कृपा अपार।
हम हैं अबोध और अनजान।
आप हो सर्वश्रेष्ठ और अपरंपार।
जगत में कितने हो रहे प्रहार।
प्रभु करें कोरोना से सबको उबार।
मानव जीवन के ऊपर छाया है महाकाल।
वायरस के विध्वंस से जीवन में आया भूचाल।
दुनिया को कोरोना वायरस बना रहा अनाथ।
हे प्रभु, परमेश्वर जगन्नाथ……….।
करें सबपर कृपा अपार…….।
तुम हो जगत के पालनहार।
फिर क्यों हो रहा इतना हाहाकार।
विनती मेरी एक बार करो स्वीकार……..।
हे जगदीश, हे महामहिम सब पर रहे तेरा हाथ…..।
हे प्रभु जगन्नाथ…।
करें सब पर कृपा अपार…..।

ऋतु राज वर्षा
रांची

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