काव्य भाषा : पालन कर (गीत) – गोकुल सोनी,भोपाल

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पालन कर (गीत)

जैसा जैसा तूँ लिखता है, 
वैसा खुद भी पालन कर 

वर्ना मत दे किसी को शिक्षा
गलत बयानी से तो डर

कितने ही लिक्खाड़ हुए
लिख डाले पोथी-पोथन्ने

पढता जिनको कोई नहीं
दीमक खा गई सारे पन्ने

कथनी-करनी भेद मिटा
खुद के चरित्र को पावन कर 

दैनिक जीवन में सच का
कितना पालन तू कर पाया

‘लाभ’ रहें ‘शुभ’ इस शुचिता का
ध्यान कभी तुझको आया?

काले कर्म, कमाई काली
से तूने भर डाला घर

आडम्बर ग्यानी लेखक का
गुटबंदी में फंसा रहा

एक धतूरा ‘पंकज’ दिखने
सदा ‘पंक’ में धंसा रहा

बस जुगाड़ में ‘सम्मानों’ की
रहा भागता इधर-उधर

गोकुल सोनी, भोपाल

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