बुधवारीय स्तम्भ : विचार वर्षा सम्हलिए, संकट अभी टला नहीं है ! – डॉ. वर्षा सिंह

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बुधवारीय स्तम्भ : विचार वर्षा

सम्हलिए, संकट अभी टला नहीं है !
– डॉ. वर्षा सिंह

कल शाम की ही बात है मेरी कॉलोनी में मैंने बाहर के कुछ बच्चे देखे। वह बच्चे कॉलोनी से बाहर के हैं यह देखते ही मैं समझ गई क्योंकि उन बच्चों ने मास्क नहीं पहना हुआ था। जी हां, मेरी कॉलोनी के बच्चे जब भी घर से बाहर निकलते हैं वे हमेशा कोरोना संक्रमण के खतरे से बचने के उद्देश्य से मास्क जरूर पहनते हैं । उन बच्चों को देखकर मैं स्वयं पर काबू नहीं रख पाई और मैंने उन बच्चों को टोंक ही दिया । मैंने उनसे पूछा – “बच्चों, आप कहां रहते हो? यहां इस कॉलोनी के तो हो नहीं ।” तो बच्चे बोले- “आंटी हम पीछे वाले मैदान के बाजू में रहते हैं। मैंने कहा -“बेटा तुम जानते हो कि कोरोना महामारी का संक्रमण फैला हुआ है लेकिन तुमने मास्क नहीं पहना है, ऐसा क्यों ? क्या तुम्हें तुम्हारी मम्मी-पापा ने कोरोना के खतरे से बचने के लिए मास्क पहनना नहीं सिखाया?”
तब उन बच्चों ने जो जवाब दिया उसे सुनकर मैं हैरान रह गई उनका कहना था कि उनके परिवार के बड़े भी घर से कहीं बाहर जाते हैं तो मास्क नहीं पहनते। वे कहते हैं कि लॉकडाउन में हमने वह सब कुछ कर लिया जो सरकार ने हमसे कहा लेकिन अब तो अनलॉक चल रहा है।अब कैसा मास्क और कैसी सोशल डिस्टेंसिंग? और कोरोना सभी को तो हो नहीं रहा है। किसी-किसी मोहल्ले में एकाध-दो केस मिलते हैं । तो भला हम क्यों डरें ?
यह तो हुआ एक वाकया और अब देखें दूसरा वाकया… आज सुबह सवेरे समाचार पत्र खोलते ही सबसे पहले मेरी नजर पड़ी सब्जी मंडी की उस तस्वीर पर जिसमें बहुत सारी भीड़ दिखाई दे रही थी और लोग बगैर मास्क पहने डिस्टेंसिंग के नियम की धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे थे। समाचार पत्र में भी इसी बात को लेकर चिंता प्रकट की गई थी कि लोग किस कदर लापरवाही बरत रहे हैं, न तो मास्क और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन। लोग मंडी में खांसते -छींकते एक दूसरे से सट कर खड़े हुए हैं मानो उन्हें इस तरह दुस्साहस करता देखकर कोरोनावायरस खुद ही भयभीत हो जाएगा। मुझे लगता है कि यह एक तरह की ढिठाई है, लापरवाही है और मूर्खता भी। क्योंकि कोरोना संक्रमण की विभीषिका का असर हम पूरे विश्व पटल पर देख रहे हैं । प्रतिदिन टीवी, समाचार पत्र, न्यूज़ पोर्टल आदि सभी सूचना माध्यमों पर कोरोनावायरस के बढ़ते हुए खतरे से हमें आगाह किया जाता है और उससे बचने के लिए मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह भी दी जाती है। इस तरह की ढिठाई, लापरवाही और नासमझी जानलेवा साबित हो सकती है स्वयं के लिए, परिवार के लिए भी …. और ख़ास तौर पर बच्चों के लिए तो यह बहुत बड़ा खतरा है। क्योंकि बच्चे वही करते हैं, वही सीखते हैं, जो वे अपने बड़ों को करता हुआ देखते हैं।
इसलिए ज़रूरी है कि हम स्वयं उदाहरण बनें और बच्चों के सामने उसे पेश करें । यदि हम कोरोना संक्रमण की गंभीरता को समझते हुए उससे बचने के लिए मास्क पहनेंगे, सेनेटाइजर का उपयोग करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे तो हमारी इस सावधानी को देखकर बच्चे भी उसका अनुसरण करेंगे और तब हमें उन्हें समझाना नहीं पड़ेगा और न ही डांटना- फटकारना पड़ेगा। वे स्वयं नियमों का पालन करते हुए स्वयं की सुरक्षा करेंगे, घर परिवार की सुरक्षा करेंगे, समाज और देश की सुरक्षा करेंगे और कोरोनावायरस संक्रमण से बचे रहेंगे।
इतना ही नहीं अक्सर समाचारों में इस तरह की तस्वीरें भी प्रकाशित होती हैं जिसमें समाज के जिम्मेदार व्यक्ति बैठकें करते हैं और उनके द्वारा कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के नियमों की अनदेखी की जाती है। वे न तो मास्क लगाते हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं । ऐसे जिम्मेदार व्यक्तियों को भी यह समझना चाहिए कि वे लोगों के लिए यदि एक आदर्श प्रस्तुत करेंगे तो लोग उनका अनुसरण करेंगे। उन्हें चाहिए कि वे स्वयं उन नियमों का कठोरतापूर्वक पालन करें जिन नियमों का पालन करने की अपेक्षा वह दूसरों से करते हैं।
तो लॉकडाउन के 4 चरणों के बाद अब इस अनलॉक के समय में हमें यह नहीं समझना चाहिए कि कोरोना का खतरा टल गया है बल्कि सतर्क रहना चाहिए क्योंकि सतर्कता ही सुरक्षा की चाबी है।
और अंत में…
बिना मास्क मत जाइए, घर से बाहर आप।
छोटी सी इक चूक से, मिले बड़ा संताप।।

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सागर, मध्यप्रदेश

2 COMMENTS

  1. युवाप्रवर्तक का नवीन स्वरूप बहुत अच्छा है। बधाई 💐 एवं
    हार्दिक शुभकामनाएं 🌺🙏🌺

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