मुज्जफरनगर से सत्येन्द्र कात्यायन ‘सत्या’ की रचना – हुंकार भरो

वीर शहीद सैनिकों को शत-शत नमन!

हुंकार भरो…..

सीमा पर तो सेनाएं लड़ती
हम तो बस घर में रहते हैं
कुछ बहके बहके मानुष तो
अब भी टिक-टॉक को चाहते है

सरकार भी चीन के सामानों पर
क्यों बैन नहीं लगवाती है?
वायरस की जांच की खातिर
टेस्ट किट भी चीन से आती है

सैनिक की शहादत की खातिर
देशप्रेम की लौं जब तक
अंतर में न जल पाएगी
तब तक सोशल मीडिया वाली
ये कच्ची देशभक्ति कहलाएगी

खून यदि अब तक न खौला
तो फिर सदियों तक पछतायेंगे
हम सब अपनी भारत माँ से
क्या ऐसा छल कर पाएंगे?

इसीलिए तो कहता हूँ
हुंकार भरो, हुंकार भरो
हिंदी-चीनी के झूठे नारों से
अब तो स्वयं को मुक्त करो

करो पूर्ण बहिष्कार चीन का
सारे प्लेट फॉर्म बंद करो
वैरी को बस वैरी जानो
हो सके तो बातचीत बन्द करो

भारत में हम भारत बनकर
बस भारत बनकर ही रहे सदा
रिपुदल आये कहीं से भी
उस दल का नाश करें सर्वदा

आओ, मिलकर अपने घर से
देशभक्ति-पथ पर बढ़ते जाएं
अपने-अपने क्षेत्र में रहकर
संहार शत्रु का करते जाएं

(चीन का पूर्ण बहिष्कार ही
सच्ची श्रद्धांजलि सपूतों के नाम)

● सत्येन्द्र कात्यायन ‘सत्या’
मुजफ्फरनगर

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