काव्य : वसंत ऋतु – सरिता गौतम लखनऊ

वसंत ऋतु

ली करवट हरियाली ने जब आई वसंत की बेला,
झूम उठे वृक्ष धरा पर ऐसे जैसे देखा हो कोई मेला।
फसले फूली झूमें धुन में,
बाँह पसारे खेलें संघ में,
पीली पीली सरसों का फूल,
मन हर्षित हो जाएँ जिसमें।
बदल रहें वस्त्र पौधे पत्तों के,
सुंदर फूल खिले हैं डाली पर,
आम के बौर हैं आने वाले,
बाग बगीचा कहते हँसके।
है वसंत ऋतु की बात निराली,
इसमें धूप लगे अति प्यारी,
भू, जल, थल सब है चमके,
प्रफुल्लित मन है जिनसे अपने।

सरिता गौतम
लखनऊ, उत्तर प्रदेश