काव्य : ऋतुराज बसंत – आरती तिवारी दिल्ली

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ऋतुराज बसंत

पौष महीना के जाते माघ का आगमन
बसंत ऋतु की आहट होने लगी..
ठंडी ठंडी शीतल मंद हवाएं चलने लगी
. पेड़ों की पत्तियां पीली हो कर झड़ती
नई कोंपले स्फुटित हो रही हैं..
महुआ के फूलों में महक आने लगी
आम के पेड़ में बौर सुंगधित..
पीली पीली खेतों में सरसों फूली..
साग सब्जियां की खेतों में बहार..
रंग बिरंगी फूलों का मौसम…
बागों में तितलियां उड़ने लगी..
भंवरे फूलों पर झूम-झूम मकरंद चूसते.
टेशु के फूल खिलने को है..
बागों में कोयल कू कू बोल रही है..
जैसे संदेशा हो गुलाबी मौसम का..
अपने प्रियतम से प्रियतमा मिलने को है
अद्भुत छटा है प्रकृति की..
बसंत ऋतु के आगमन से सब तरफ उत्सव सा आनंद है…
आई बसंत रितु ऋतुराज आयो रे..
पेड़ों पर छाई नवयौवनी बहार रे..!!

आरती तिवारी
©® दिल्ली

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