अमावस्या – किरण काजल बेंगलुरु

अमावस्या

अमावस्या को लेकर लोगों के मन में काफी सारी नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते है ।
अमावस्या कोई काली परछाई नही अपितु भक्ति का एक सहज मार्ग है ।इस तिथी में ज्यादा से ज्यादा पूजा,पाठ ,हवन और भजन-कीर्तन करना चाहिए।और करने का विधान भी है।
सनातन धर्म में
जिससे साकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि हो
और नाकारात्मक ऊर्जा कि समाप्ति।
सोच जितना सीधा रहेगा ज़िंदगी भी उतनी ही सरल!
इस साल मौनी अमावस्या 9 फरवरी सुबह 8 बज कर 2 मिनट से शुरू होकर 10 फरवरी सुबह 4 बज कर 28 मिनट पर समाप्त होगी ।
मौनी अमावस्या को सभी अमावस्या में विशेष माना गया है।
माघ मास की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या तिथी मौनी अमावस्या कहलाती है। इस दिन को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
अमावस्या तिथी में गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
कहते है की इस तिथी पर गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है । और मान्यता तो यह भी है कि मौनी अमावस्या के दिन पितर और देवता गुप्त रूप से प्रयागराज संगम नदी में स्नान करने के लिए आते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त(अर्थात सूर्योदय के समय )गंगा के जल में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है । और निर्मल काया प्राप्त होती है ।
साथ ही आज दान पुण्य करने का भी बड़ा महत्व है।
आज के दिन दान करने से पितर और देवता दोनों प्रसन्न होते हैं जिससे घर में सुख शांति समृद्धि दीर्घायु और निर्मल काया प्राप्त होते है।इतना ही नही मृत्यु के पश्चात मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।
कहा जाता है की मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से
आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।मौन व्रत से तात्पर्य
स्वयं के मन में झांकना,अपने आप से मिलना और प्रभु की भक्ति में लीन हो जाना होता है ।
अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान आदि करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
महाराज दक्ष के श्राप के कारण
चंद्रमा का घटना और बढ़ना
आज भी सुचारू रुप से चल रहा है।
अमावस्या एक क्रम है एक चक्र है।
यह एक पड़ाव है ठहराव नहीं
कृपया इसे अन्यथा ना लें….
अमावस्या को काल रात्री
या काली रात भी कहते है।
क्यों कि इस रात चन्द्रमा नही निकलते।
आज मैं आपको एक सच्ची घटना सुनाती हूं।
आज से लगभग आठ या दस साल पहले मैं अपने
परिवार के साथ भगवान बाला जी के दर्शन करने
तिरूपति गई थी ,यात्रा सफल रहा हमारा और बहुत ही
अच्छे से हमने भगवान तिरूपति बाला जी के दर्शन किए।
उस रात हमलोग वहीं रूक गए ।क्यों कि कहा जाता है की
तीर्थ करने का फल तभी मिलता है जब वहां रात्री व्यतीत किया जाए…
दुसरे दिन अगली सुबह हम सभी फिर स्नान आदि करके भगवान बाला जी के दर्शन करने गए ।
दर्शन तो हमें बहुत अच्छे से हुए पर हम सभी वहां की स्थिति देख कर चौंक गए ….
मंदिर या मंदिर के आसपास पुजारी को छोड़ कर केवल वहां काम करने वाले लोग ही मौजूद थें । जहां हमेशा हजारों लाखों की संख्या में लोग दर्शन करते थे वहां ऐसी सन्नाटा कभी हमने सुनी तक नही थी।
दर्शन करने के बाद हमलोग बाहर बाजार में प्रसाद खरीदने के लिए गए वहां की स्थति भी मंदिर जैसी ही थी बस दुकानदार और उसके परिजन ही वहां थे और कोई खरीदार नही
हम ने दुकान से प्रसाद ,बाला जी की फोटों और सिंदूर,कुमकुम खरीदा फिर दुकानदार से पुछा भाई एक बात बताओ आज यहां इतनी शांति या सन्नाटा क्यों है ,मंदिर भी बहुत खाली है और बाजार भी सुनसान है ।
तो दुकानदार ने कहा आज अमावस्या है ना
तो हमने कहा तो क्या हुआ
तब हमें उस दुकानदार ने बताया अमावस्या के दिन यहां कोई पूजा करने नही आता है ।आप लोग जल्दी सामान ले लीजिए हमें दुकान बंद करना है ।
तो मैनें कहा छोड़ दीजिए हम कहीं और से लें लेंगे
दुकानदार मुस्कुरा कर बोला मैडम आज मंदिर के आस-पास के सारे बाजार और दुकानें बंद मिलेंगे आपको आप ले लीजिए आपको क्या चाहिए मंदिर से घर खाली हाथ जाएंगे तो अच्छा नही लगेगा मैं भी दुकान बंद करने ही वाला था की आप लोग आ गए या फिर बाला जी की कृपा है आपसब पे जो मेरी दुकान खुली मिल गई आप सबको मैं दुकान की पूजा करने आया था। और अब जाऊगा मैं मंदिर अपने प्रभु बाला जी से मिलने बस एक ही दिन तो हमें मिलता है प्रभु से बातें करने के लिए ।अपनी व्यथा कथा सुनाने का ,तो मैनें कहा अगर कोई अमावस्या को पूजा करने नही आता है तो फिर आप लोग क्यों अमावस्या को मंदिर जाते है।
इस पर उस दुकानदार ने हसते हुए कहा अपनी-अपनी सोच है ये
अगर हम आज के दिन मंदिर नही जाएंगे तो हम भगवान से कैसे मिल पाएगे देखिए अगर हम भीड़ में भगवान से मिलते है तो भगवान जी पूरा ध्यान हम पे नही दें पाते है क्यों की उनको सबके ऊपर ध्यान देना होता है तो हमें थोड़ा ही आशीर्वाद प्राप्त होता है भगवान का मग़र आज के दिन हम निश्चिंत होकर भगवान का ध्यान अपनी तरफ़ आकर्षित कर उनका पूरा आशीर्वाद भी प्राप्त करते है बस उन्हीं से तो हम व्यापारियों का जीवन-यापन होता है।

किरण काजल
बेंगलुरु