काव्य : खुद से हम वादा करें – रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़

खुद से हम वादा करें

विधा गीत

फूल खिलने मन मिलने लगे महक गई वादियां।
मनमीत मेरे संगीत सुहाने भाने लगी शादियां।
आओ आओ सनम आज खुद से हम वादा करें।
मिलेंगे कहीं हम सनम प्रेम हद से भी ज्यादा करें।

राहे खुल गई बातें घुल सी गई जुबां पे सनम।
हवाओं की खुशबू से महका दो अपना ये मन।
मन मयूरा झूम उठा आओ आगे कदम धरे।
आशाओं के दीपक ले रोशन ये जीवन करें।

ये नजारे हसीं महकती वादियां मिलने को सनम।
दिल की बातें मधुर सुहाने वो पल याद करते हम।
सीमाएं सरहद क्या बांधे हम प्यार में जीएं या मरे।
दिल यह कहता मेरा आओ खुद से हम वादा करें।

गीत नगमे तराने वो प्यार के मन में उठने लगे।
मोहक झरने सुहाने बहारों के जब झरने लगे।
चले ना जाना यूं कभी हमसे मुंह मोड़ प्रिये परे।
धीर धरो प्रियतम आओ खुद से हम वादा करें।

मन के जुड़ जाये तार जब संगीत बने प्यार के।
दो दिलों की धड़कनें जब मौसम खिले बहार से।
चले आना मत रुकना तुम बैठ मीठी बात करें।
बांटे प्यार के अनमोल मोती खुद से वादा करें।

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान