काव्य : आज देश‌ में हुई दीवाली – सुमन युगल मुजफ्फरनगर

लोक गीत

आज देश‌ में हुई दीवाली

घृत के दीपक चहूँ ओर जले हैं ।
जन- जन के मन के कमल खिले हैं।।
उजली हुई अमावस काली ।
आज नगर में हुई दीवाली ।।

झांझर झनके मृदंग बाजे और बजे है शहनाई,
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई
कौशल्या माता दे दो बधाई
धनुष यज्ञ में बड़े-बड़े थे
गर्दन नीचे किए खड़े थे
राजा जनक भी हठ पे अड़े थे
दृश्य पे सबके नेत्र गड़े थे
प्रत्यंचा प्रभु ने चढ़ाई
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई..
राम लाल मैया कितने बांके
देख के सबकी खुल गयी आंखें
विदेहराज मन में हर्षाए
नयन सिंधु मोती भर लाए
देव गणों ने फूल बरसाए
स्वयं जानकी वधू हुई हैं,
माता भवानी वधू हुई हैं
वर हुए हैं रघुराई
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई
कौशल्या माता दे दो बधाई
सोना नहीं लूंगी मैया ,चांदी नहीं लूंगी
सोना नहीं लूंगी मैया चांदी नहीं लूंगी
हीरे नहीं लूंगी मैया मोती नहीं लूंगी
महल, दुमहले ,अटारी नहीं लूंगी
बाग- बगीचे, केसर क्यारी नहीं लूंगी
कलाबत्तूर की सारी नहीं लूंगी
कृपा की करूं हूँ दुहाई
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई
कौशल्या माता दे दो बधाई
माँ बस तुम इतना कर दो
अहेतु की कृपा कर दो
मुझको छोटा सा एक वर दो
वरद हस्त मेरे सिर पर धर दो
सुख से मेरी झोली भर दो
जय हो तुम्हारी महामाई
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई
कौशल्या माता दे दो बधाई
माता प्रभु से इतना कहना
माता प्रभु से बस ये कहना
भक्त जनों के मन में रहना
जीवन के अंतिम पनघट पर
आऊंगी जब मैं मरघट पर
रामलाल मेरी बिगड़ी संवारे
नैया भंवर से पार उतारें
हाथ पकड़ प्रभु बने सहारे
मांगे नहीं उतराई
कौशल्या माता दे दो बधाई
ब्याह की सुणकै मैं आई
कौशल्या माता दे दो बधाई।

सुमन युगल
मुजफ्फरनगर