राम काव्य रसधार का हुआ लोकर्पण और महादेवी वर्मा कक्ष में बही काव्य रसधार

राम काव्य रसधार का हुआ लोकर्पण और महादेवी वर्मा कक्ष में बही काव्य रसधार

भोपाल।
अस्मि प्रकाशन द्वारा आज 18/01/2024 दिन गुरुवार को हिन्दीव भवन के महादेवी वर्मा कक्ष में साझा काव्य। संकलन राम काव्य रसधार का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विकास दवे, निदेशक साहित्य् अकादमी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेश श्रीवास्तव, कार्यपालन अधिकारी मेला एवं तीर्थ/निदेशक रामायण केन्द्र, विशिष्ट अतिथि डॉ. राम वल्ल‍भ आचार्य प्रादेशिक अध्यक्ष, लेखक संघ मध्यप्रदेश तथा सारस्वत अतिथि श्रीमती उषा जायसवाल, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व अध्यक्ष हिन्दी् लेखिका संघ उपस्थित रहे। 29 रचनाकारों से के साझा काव्य से सजी इस पुस्तक का संपादन डॉ. प्रीति प्रवीण खरे ने किया है तथा प्रकाशन अरविन्द शर्मा ने किया है। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्री घनश्याम मैथिल ‘अमृत’, ने करते हुए कार्यक्रम को बांधे रखा। सरस्वती वंदना युवा साहित्यकार हर्षित तिवारी ने की। प्रस्तु्ति के साथ ही पुस्तक का लोकार्पण हुआ। अपने अध्यक्षीय वक्‍तव्‍य में डॉ. विकास दवे ने कहा कि राम ही राष्ट्र हैं, ‘राम काव्य रसधार’ साझा संकलन भी इस श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण पुष्प है। राम भारत की धमनियों में दौडऩे वाला रक्त हैं। प्रभु राम मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप में जितने पूज्य हैं, उतने ही राजा राम के रूप में भी और उतने ही परिवार के प्रत्येक रिश्ते के रूप में भी वे पूजे जाते हैं। तभी तो लोक में राम को लेकर जितनी श्रद्धा हमें दिखाई देती है वैसी अन्यत्र किसी विषय को लेकर नहीं। कार्यक्रम के मुख्यक अतिथि डॉ. राजेश श्रीवास्तरव ने कहा रामकाव्य रसधार सुंदर संज्ञा है। साझा संकलन के संदर्भ में यह नाम और भी समीचीन है। संपादकद्वय डॉ. प्रीति खरे और अरविंद शर्मा ने जब इस साझा संकलन का विचार किया होगा तो निश्चय ही उस उपवन की कल्पना भी की होगी जिसमें रंग-बिरंगे पुष्प खिले रहते हैं। रसों के सतत प्रवाह से जो आनंद रूपी झरना झरता है वही तो रामरस है। अद्भुत ऊर्जा से परिपूर्ण होता है रामरस। विशिष्ट अतिथि डॉ. रामवल्लभ आचार्य ने इस प्रकार के कार्यक्रम की सार्थकता बताते हुए अपनी रचना सुनाई। सारस्वत अथिति श्रीमती उषा जायसवाल ने पुस्तक पर अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किये। रामकाव्य रसधार की संपादक डॉ. प्रीति प्रवीण खरे ने सभी रचनाकारों पर विस्तार से अपने विचार रखे और स्वागत वक्तव्य दिया। आभार श्रीमती जया केतकी ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रामकाव्य रसधार में सम्मिलित रचनाकारों का काव्य पाठ हुआ, जिसमें अतिथि के रूप में अशोक धमेनियां, सुरेश पटवा एवं अध्‍यक्ष के रूप में गोकुल सोनी मंच पर उपस्थित रहे। इन साहित्यकारों का हुआ सम्माुन डॉ. कुंकुम गुप्ता, श्रीमती करुणा श्रीवास्तव, श्रीमती कुसुम श्रीवास्तव, श्रीमती कीर्ति विद्या सिन्हा, पं. गिरी मोहन गुरु, श्री चन्द्रकांत वाजपेयी, श्री धर्मदेव सिंह, श्रीमती नीलिमा पालीवाल, डॉ. प्रभा मिश्रा ‘प्रज्ञा’, श्रीमती प्रेक्षा सक्सेना, श्रीमती पूर्णिमा चतुर्वेदी, श्रीमती भूपेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. मालती बसंत, डॉ. माया दुबे, डॉ. मीनू पाण्डेय ‘नयन’, श्रीमती राजकुमारी चौकसे ‘प्रेरणा’ , डॉ. रेणु श्रीवास्तव, श्रीमती रीना मिश्रा, श्रीमती लीना बाजपेयी, श्री विपिन बिहारी वापजेयी, श्रीमती श्यामा गुप्ता ‘दर्शना’, श्रीमती सुधा दुबे, श्रीमती सुनीता शर्मा ‘सिद्धी’, श्रीमती सुनीता मिश्रा, श्रीमती सुषमा श्रीवास्तव ‘सजल’, श्रीमती सुशीला सैनी एवं श्रीमती हंसा श्रीवास्तव ‘हंसा’ ।