साहित्यकार श्रीमती गीता चौबे गूँज को मिला काव्य कुसुम सम्मान

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साहित्यकार श्रीमती गीता चौबे गूँज को मिला काव्य कुसुम सम्मान

बैंगलोर।
14 जनवरी, 2024 को विद्योत्तमा फाउंडेशन के सम्मान-समारोह में बैंगलोर की साहित्यकार श्रीमती गीता चौबे गूँज को उनकी कृति ‘मौसम की अंगड़ाई’ के लिए काव्य कुसुम सम्मान से सम्मानित किया गया जिसमें ट्राफी, शाॅल, प्रशस्ति-पत्र के साथ 2100 रुपये की राशि भी दी गयी। साथ ही उनके दूसरे उपन्यास ‘लंबी होती परछाइयाँ’ का विमोचन भी हुआ। अकोला से आयी हुई डॉ पूनम मनकार पिसे ने उपन्यास की जानकारी देते हुए कहा कि श्रीमती गीता चौबे गूँज का यह उपन्यास वृद्ध-विमर्श के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी समर्पित है। नयी और पुरानी पीढ़ी के उचित तालमेल से जीवन की कई समस्याएँ सुलझायी जा सकती हैं… यही उपन्यास के मुख्य बिंदु हैं जिन्हें छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया है। डॉ पिसे ने इसे एक सफल उपन्यास बताते हुए आगे कहा कि यह उपन्यास हमारे समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
इस कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ अजीत बी नागरगोजे, मुख्य अतिथि श्री के. सी. पांडेय, विशिष्ट अतिथि श्री गोविंद झा थे। संचालन श्रीमती सुधा झालानी ने किया। देश के कोने-कोने से आए साहित्यकारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य जनों से सज्जित इस सभा का धन्यवाद ज्ञापन विद्योत्तमा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री सुबोध मिश्रा जी ने किया।

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