कहानी : ईमानदारी – डॉक्टर प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार टीकमगढ़

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कहानी

ईमानदारी

सिया अपने एग्जाम के लिए भोपाल गई जब से शादी हुई है वह अपने पति के साथ ही कहीं भी जाती है उसने पहले से ही टिकट बुक करवा रखी थी इसलिए किसी परेशानी का कोई सामना नहीं करना पड़ा रात को होटल में पहुंचे पेपर दूसरे दिन 2:00 बजे से था चौकी नेशनल लॉ कॉलेज केरवा बहुत दूर है , तो इसीलिए दोनों ने 12:00 निकालने का सोचा पति-पत्नी ने रूम का लॉक लगाया और चाबी रिसेप्शन पर देने आए पर रिसेप्शन पर कोई दिख नहीं सो यह सोचकर कि चलो साथ में ही ले चलते हैं जिस ओला को बुक किया था वह आ चुकी थी ओला में बैठते ही चाबी सीट पर रख ली सीमा यह भूल गई की पति ने उससे कहा था की चाबी वापस उठा लेना पति ओला वाले से बातें करते चले जा रहे थे कहीं पॉलिटिक्स पर बातें हो रही थी तो कहीं भोपाल के बारे में बातें चलती रही सीमा बाहर के नजारे देखने में मस्त थी भोपाल है वी बड़ा सुंदर गाने व्यवस्थित पेड़ बड़े अच्छे लगते हैं सड़के साफ चौड़ी चौड़ी ओला दौड़ती जा रही थी क्योंकि एग्जाम में कुछ लाने का परमिशन नहीं रहती है इसलिए वह पर्स और मोबाइल भी होटल में ही छोड़ कर आई थी जैसे ही नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी आया वहां सभी अपने साथियों को देखकर सीमा बड़ी खुश हो गई उसकी सहेली ने जोर से आवाज लगाई , पति पहले ही उतर चुके थे और सीमा भी उतर गई पर यह भूल गई की चाबी तो उसने ओला में ही छोड़ दी ओला वाले को सीमा के पति ने पेमेंट कर दिया था उसके बाद थोड़ी देर बाहर खड़े होने के बाद जैसे ही सीमा अंदर जाने लगी सीमा के पति ने उससे पूछा चाबी रख ली थी ना होटल की वह मुझे दे दो सीमा के तो होश ही उड़ गए चाबी तो उसने ओला में ही छोड़ दी थी अब क्या होगा खैर सीमा के पति ने समझाया कोई बात नहीं पेपर दो बाकी की चिंता छोड़ दो और वह पेपर देने अंदर चली गई पेपर 5:00 बजे खत्म हुआ तब तक उसके पति भी आ चुके थे पति ने बताया कि कांटेक्ट करने की कोशिश की थी पर उसका नंबर नहीं लगा दोनों सोच विचार में ही थे तभी ओला आकर पास में रुकी अरे यह तो वही ओला थी, वह किसी सवारी को बिठा हुए थे उन्होंने चाबी सीमा के पति को थमते हुए कहा मैं जब दूसरी जगह पहुंचा तो सवारी ने कहा यह चाबी किसकी छूट गई है तब याद आया कि यह तो शायद आपकी छूट गई है.इसीलिए मैं देने चला आया मेरे पति तो उसकी ईमानदारी के कायल हो गए सच में भोपाल जितना सुंदर है उतने ही अच्छे लोग लोग वहां के , अक्सर लोग कहते हैं कि ईमानदारी खत्म हो गई है पर उस ओला वाले ने यह साबित कर दिया कि ईमानदार व्यक्ति आज भी है . उसे ओला वाले ने अपनी ईमानदारी और समझदारी से सीमा के पति का दिल ही जीत लिया वरना उसे क्या पड़ी थी वह इतनी दूर से चाबी देने आता.सीमा के पति रास्ते में दूसरे ओला में उसकी तारीफ करते चले आए .आज भी दुनिया में ईमानदारी बाकी है.सीमा के पति ने उसे पैसे देने चाहे पर उसने, हंस कर मन कर दिया. हाथ मिलाकर चला गया. पर अपनी ईमानदारी की छाप दिल पर छोड़ गया.

डॉक्टर प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़

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