लघुकथा : राशिफल – सुनीता सोलंकी ‘मीना’ मुजफ्फरनगर

लघु कथा

राशिफल

अरे आज अखबार नहीं आया क्या ? 26 जनवरी थी ना कल , शायद इसीलिए अखबार नहीं आया है । बीवी ने बता दिया।
वह बडबडाते हुए ….. अच्छा ठीक है चलो एक कप चाय तो पिलवा दोगी और कल वाला ही अखबार दे दो यार उसे ही दुबारा पढ़ता हूँ! बीवी मुस्कुराई और दोनो चीज लेकर हाजिर हुई ! बैठते हुए हद करते हैं आप ऐसी भी क्या लत!
उसे राशिफल पर इस कदर विश्वास था कि इतना तो कभी पूर्णतः खुद पर भी नहीं था।
अखबार हाथ में आते ही उसमें राशिफल वाले पेज को खोलकर राशि पढना और फिर अखबार मोडकर एक तरफ रख देना।
दोस्त ने कहा यार हम एक निगाह डालते जरूर हैं मगर यकीन नहीं करते।
वह झट से बोला यार एक दिन भी मैं राशिफल देखना भूल जाऊँ ऐसा हो नहीं सकता। जरूरी काम से पहले मै नियमित राशिफल देखता हूँ अखबार ही इसीलिए मंगवाता हूँ। वरना राजनीति खबर कौन पढे। आए दिन अखबार की झूठी सच्ची खबर तो पड़ौसियों से जंग करवा देंगी तोप बन्दूक पिस्तौल चलवा देंगी घरों में आपस में।

उसके अन्य बहन भाई माँ बाप सब ही उसकी इस आदत से परेशान रहते थे। हुआ ये कि यही ज्योतिषी या राशिफल देखने का असर उसके बेटे पर ज्यूँ का त्यूँ आ गया।
क्योंकि ऐसे लोग चमत्कारिक रूप से मालदार होना चाहते है बिना कुछ किये धरे। राशिफल के इंतजार में समय गंवा देते है कि धन आएगा।
मगर नही आता तो फिर अगले दिन की आस में लेट जाते हैं। और यूँ ही राशिफल देखते देखते उसका इंतकाल हो गया।
और आज उसका बेटा जिस पर बाप की अच्छाई की छाप बिल्कुल नहीं पडी। मगर एक दो जो अजीब बात बाप में थी वही हू ब हू बेटे में आ गयी । आज बेटा भी राशिफल देखकर समय का इस्तेमाल करता है । दिशा निर्देश पढकर कदम उठाता है ।जिसका नतीजा ये कि बस चलते चलते या काम करते करते भी जहाँ का तहाँ रुक जाता है।
मेरा मतऴब यह कतई नहीं कि ज्योतिष विधा नहीं होती ।मैं विधा को मानती हूं उसके गणितज्ञ को मानती हूं ।मगर अंधविश्वास में विश्वास नहीं करती। अतिवाद से बचें !

सुनीता सोलंकी ‘मीना’
मुजफ्फरनगर उप्र