रेलवे को 30 साल पीछे ले जाते ये संदेश – इंजिनियर अरुण कुमार जैन,फरीदाबाद

रेलवे को 30 साल पीछे ले जाते ये संदेश

मुझे 5 जनवरी 24 को दिल्ली से एर्नाकुलम की यात्रा ट्रेन 12218 केरल संपर्क क्रांति से करनी थी. सीट कन्फर्मेशन की सूचना 4 जनवरी को आ गयी थी. 2900 किमी की यात्रा है, सारी तैयारी कर सो गया.5 जनवरी की सुबह उठते हीरेलवे का विगत रात्रि भेजा एक सन्देश मिला कि तकनिकी कारणों से आपकी ट्रेन आज 5/1/24 को हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से नहीं जाएगी, जाने से पूर्व रेलवे से उनके नंबरों पर संपर्क कर लें. मन में परेशानी,उद्वेग आ गया. तुरंत कई रेलवे के मित्रों को रेलवे का मैसेज फॉरवर्ड किया व मार्गदर्शन माँगा.
भोपाल के स्टेशन अधीक्षक रहे मित्र ने बताया कि ट्रेन दिल्ली से पहिले से ही कोटा की ओर डाइवर्ट हो जाएगी, आप शाम 6:0 के पहिले कोटा पहुँच जाएँ.कई अन्य मित्रों ने भी रेलवे कंट्रोल से बात की पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी.
कोटा समय पर पहुँचने के आसार नहीं थे क्योंकि घने कोहरे के कारण ट्रेन लेट चल रहीं थीं. बच्चों ने अगले दिन तत्काल में आरक्षण लेने की सलाह दी व एडवांस राशि भी एजेंट को भेजने को तत्पर हो गए, पर मैंने मना कर दिया.
इसी बीच 9:18 पर पुनः सन्देश आया कि ट्रेन निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से नहीं जाएगी.
बच्चों ने रेलवे केअधिकृत एप पर देखा, उसके अनुसार ट्रेन निजामुद्दीन स्टेशन से जा रही थी.
बड़े ही असमंजस की स्थिति थी,3000 किमी की यात्रा थी, भीषण सर्दी, कोहरा अलग, आंतोगात्वा टैक्सी लेकर निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के लिए निकल गया.
डेढ़ घंटे की टैक्सी यात्रा में भी संशय रहा पर विश्वास था कि आज मंदिर जी में भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य पाया, प्रभु आराधना की है अतः अमंगल नहीं होगा.
लगभग 12:15 पर निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचा. प्लेटफार्म नंबर 1 पर ट्रेन डिस्प्ले सिस्टम पर 12218 केरल संपर्क क्रांति की जानकारी नहीं थी, अन्य सभी ट्रेनों के विवरण पटल पर थे, इन्क्वारी विंडो पर बताया कि ट्रेन सही समय पर आएगी, पर उनके बोर्ड पर भी इसकी जानकारी नहीं लिखी थी, हारकर स्टेशन निदेशक के कक्ष में गया व सही स्थिति जाननी चाही, उन्होंने बताया ट्रेन निजामुद्दीन आएगी.
प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर भारी सामान संग पहुँचा, अंततः ट्रेन 25 मिनिट बिलम्ब से आयी व मैंने सहजता का अनुभव किया.
आज जब सारी सूचनाएं पल पल में सारी दुनियां में पहुँच रहीं हैं, रेलवे जैसे प्रतिष्ठित व मार्डन विभाग में यह लापरवाही क्यों??
लगातार दो सन्देश रात्रि 8:55 व अगले दिन 9:18 पर कि ट्रेन निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर नहीं आयेगी, हर व्यक्ति यही समझेगा कि उसे अपनी यात्रा की दूसरी व्यवस्था करनी है व वह भी मेरी तरह अगले दिन या अन्य ट्रेन से जाने का विचार करेगा.
रेलवे के NRES से अलग जानकारी, दूसरे IRCTC से जुड़े एप से अलग जानकारी अत्यंत भ्रम उत्पन्न करती है.
कम पढ़े लिखे लोग, कम्प्यूटर से अपरिचित लोग कितनी असुविधा व परेशानी का अनुभव करेंगे, इसकी कल्पना भी रेलवे को, उन परिचालन विभाग के अधिकारियो को करनी चाहिए, जिनकी जरा सी लापरवाही से साधारण यात्री को कितनी परेशानी हो रही है.
रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर गाड़ी नहीं दिखना!!दिल्ली जैसे महानगर में कितना कष्टदायक है.
एक और अनुरोध इस तरह के परिवर्तन यदि करने हैं तो 1-2 दिन पूर्व सूचना दी जानी चाहिए ताकि व्यक्ति अपनी अन्य व्यवस्था कर लें, सोते हुए व्यक्ति को गलत सन्देश देना, अगली सुबह फिर उसे दुहराना व फिर कभी भी सही सन्देश न देना कितना वेदनादायी है ये ए. सी. कक्ष में बैठे रेलवे के इन लापरवाह अधकारियों को कब समझ आएगा?
आज वन्देभारत जैसी ट्रैन चलाकर हम गौरव के पथ पर बढ़ रहे हैं वहीं इस तरह के भ्रामक सन्देश देकर हजारों यात्रियों को परेशान कर रहे हैं व यह समझने पर मजबूर कर रहे हैं कि रेलवे 30 वर्ष पीछे जा रही है, जब रेलवे इन्क्वायरी का फोन बाबू की मर्जी पर ही उठता था.

इंजिनियर अरुण कुमार जैन
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