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Devendra Soni February 21, 2019

“मुझको प्यारी मेरी हिंदी” भाषाओं का वट-पादप यह जिसका सब अभिमान करें हम, निज पावन भाषा हिंदी का सब दिल से सम्मान करें हम। उर में शब्दों का सागर और ले ललाट पर रोली बिंदी, भाषाओँ में उत्तम है जो मुझको प्यारी मेरी हिंदी ।। संस्कारों से पूर्ण सुसज्जित समरसता के गीत सुनाती, कागज की […]

Devendra Soni February 21, 2019

………जीवन मंत्र ……… जीत सको तो प्रेम जीतो नफरत को निकाल फेको पी सको तो क्रोध पी लो बैर मन में मत पालो ! खा सको तो गम खा लो जीवन को खुशहाल बना लो दे सको तो दान दे दो लूट-मार करना छोड़ दो! दिखाना है तो दया दिखाओ बेरहम इंसान मत बनो लेना […]

Devendra Soni February 21, 2019

स्वरचित कविता ———————- आखिर कब तक? **************** अट्ठासी आंखें उस पार, टकटकी लगाए करती इंतजार, वो मेरे निर्भीक सरकार, अब करो तुम प्रचंड प्रहार, दहला दो, कर वीभत्स संहार. इन सांपों को मत दूध दो. (ना)पाक को नेस्तनाबूद करो. नोच लो इनकेचांद-सितारे, उस हरे-झंडे को बेरंग करो. कुत्ते की शक्ल जैसा वह देश, उस पागल […]

Devendra Soni February 21, 2019

कुछ यादें … कुछ यादें साथ लाई, कुछ तुम्हारे पास छोड़ आई हूँ… वो पहेलियांँ जो एक दूसरे से, पूछा करते थे, ज़बाब पता होने पर भी, हार मान लेते थे, वो जीत वहीं छोड़ आई हूंँ… वो बातें जो तुमसे करती, बेमतलब, बेतुकी, फालतू की बातें, उनके अंश मै बुन लायी हूंँ…. वो सिलवटें […]

Devendra Soni February 21, 2019

कहानी – जीवन इच्छा… जिंदगी से प्रेम हर उम्र में होता हैं, चाहे बूढ़े हो या जवान। जीने की आस सबकी बरकरार रहती हैं। ये कहानी भी ऐसी वृद्धा की हैं, जो जिन्दगी की भीख मांग रही हो मानो, वो भी अपने बेटों से… अब आप सोच रहे होंगे कि उसके बेटे उसे मारते -पीटते […]

Devendra Soni February 21, 2019

इन्सान को बस इन्सान रहने दो कायनात के पालने में झूलते वो सपने हमारे तुम्हारे जिसकी कहीं चर्चा भी हमने नहीं की मन में ही रखा पूरे होते रहते हैं आप ही कोई तो है जिसका नाता हृदय की धड़कनों से है और धड़कनों संग तरंगित इच्छाओं से भी कहने की जरुरत नहीं होती वो […]

Devendra Soni February 21, 2019

जीवन साथी आँसू *************** आँसू है हमारे सच्चे जीवन साथी, सदैव जीवन रथ पर संग रहते बनकर सारथी। गम की घड़ी में बहती रहती है अविरल आँसू , सुख की बेला में भी बहते हैं आँसू। अपनत्व छलकती है आँसू से ही, सगे-संबंधित काम आते हैं चापलूसी से ही। बहती है दिल से होकर नयनों […]

Devendra Soni February 21, 2019

चेतावनी संवेदना नष्ट होने लगी है वेदना कष्ट लगने लगी है ।। युद्ध जहर लगने लगा है विरोध का ताकत जमने लगा है ।। आँसू सबकी सूखने लगी है, चेहरे सबकी अब चमकने लगी है मिडिया का व्यापार जितना होना था हो गया नेता सारे चुनाव के गतिविधियों में खो गया अब हर ओर तो […]

Devendra Soni February 21, 2019

ये जीवन ये जीवन !! सिर्फ तुम्हारे लिए ही बना है … मगर फिर भी !! वो दूसरो की इच्छाओं से बंधा है .. क्या !! समझ पाये हो तुम ?? इस जीवन की सार्थकता !! -सच कहो  ?? जो चाहा तुमने क्या वो तुम्हे मिला है ?? शायद सारी कोशिश !! तुम्हारी सही थी […]

Devendra Soni February 21, 2019

कविता बर्फ कितना आन्नद, कितनी खुशी स्नो फाॅल देखने, देखते चले जाने में रुई के फाहों से गिरते बर्फ में झूमने, गोले हिम के एक – दूसरे पर उछाल खुद उछल जाने में कितना- कितना तो है कठिन हर पल उसे सीने पर लादे तुषार धवल धरा पर सोने, सो जाने में चिनार, देवदार की […]