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Devendra Soni November 27, 2018

-आत्मा कौन कहता है अमर है आत्मा मरते देखी है हमने जनमानस की आत्मा बढ़ते पापाचार धरती पर देते उदाहरण मरती आत्मा के आत्मा तो संवेदनशील है पर आज हर कोई संवेदनहीन है कट रहे मूक प्राणी मिट रहे भ्रूण कोख में मर रही आत्मा चंद नोटों लालच में बढ़ रहा भ्रष्टाचार बिक रही आत्मा […]

Devendra Soni November 27, 2018

नई कविता – हौसले की आवाज आज क्या होगा कल क्या होना है? ये मत सोच ईश्वर के हर एक बंदे क्योंकि हर लम्हा हमारा है। मुश्किलें आएंगी मुश्किलें जाएगी। कर सामना मुश्किलों से बुलंद हौसले के साथ मुश्किलें पल में छू मंतर हो जाएगी। धरा पर धर पाँव धीरे- धीरे यूं ही बढ़ती जाएगी […]

Devendra Soni November 27, 2018

बहना ,दुर्गा बन जा भू पर ******************* इस पावन भारत भू पर ये कैसी आँधी आई है ? पुरुष यहाँ हैं लोग बहुत पर विरले कोई भाई है . दरिंदगी की घनी धूंध है बहनों को लाज बचानी है, बेवस बनी बालाओं की ये कैसी करूण कहानी है ! भाई का फर्ज निभानेवाले लोग भी […]

Devendra Soni November 27, 2018

*चुनावी माहौल :जाति न पूछो साधू की* चुनावों में वाणी का स्तर इतना नीचे आ जायेगा इसकी किसी ने कल्पना भी नही की थी । कोई किसी के माता पिता तक पहुच रहा है तो कोई किसी की जाति पूछ रहा है । सत्ता धारियों ने जब चीख चीख कर विपक्ष के नेता की जाति […]

Devendra Soni November 27, 2018

नई कविता – कर्मों से बिखर गए भगवान और इंसान का सदा से ही था और सदैव अनुबंध रहेगा ईश्वर ने तो सिर्फ इंसान बनाया कि सबसे सबका अच्छा संबंध रहेगा मानव लेकिन सारे जग में आकर अपने अपने कर्मों से बिखर गए क्या पता उसे कि मानव को मानव ही मानने पर दुनिया में […]

Devendra Soni November 27, 2018

नई कविता – अंजान हूँ मैं अंजान हूँ मैं अपनों के सतरंगी चालों से तो गैरों के मुखौटों से वक्त़ के सितम से तो कभी साजिश-ए-किरदार से अंजान हूँ मैं उस पथरीली राहों से तो कांटे बिछाएँ शेजों से तेरे दिल के इरादों से तो अपने दर्द-ए-मलहम से अंजान हूँ मैं देख के हाथ रंगे […]

Devendra Soni November 27, 2018

सूखे का संताप ———- भूतल समतल और थी हताश पेट की लहर ज्वालाओं पे खौल रहे थे जल के पात्र फिर भी गर्म हवाओं के झोकों में झूम रही थी पलाश जैसे खींची खींची सी हड्डियों में खेल रहे थे कुछ बच्चे बदहवाश छुआ-छुई और जीत के आगोश में धौंष जमा रही थी उनके सांसो […]

Devendra Soni November 27, 2018

नई कविता – अकेलापन अकेलापन बहुत ही सकुचा देता है मन को और कभी जीवन को छीन लेता है एक बोझ की माफ़िक चेहरे की रौनक को मुरझा देता है हमारें भीतर के जोम और जुनून को अकेलापन हरपल तलाशता है चेहरे से भरी यह दुनियां में कोई सुकूनदायी चेहरा खोजता है सुखी हुई क्यारियों […]

Devendra Soni November 27, 2018

दिल की समझाईश *************** एक दर्द उठा था सीने में, मुश्किल हो रही थी जीने में, हमने दिल को समझाया, बीती बातों से बहलाया, जो हो न सका तेरा वो सपना है, होगा कोई तो खड़ा जो अपना है, सुन बातें मेरी दिल मुस्काई, बोली तू है क्यूँ घबराई, जो तुझे है दर्द हुआ, वही […]

Devendra Soni November 27, 2018

कविमन मधुर-मधुर यादें कह देता अनकही सी बातें कह देता, स्याही में जो  भाव डुबोकर बोले अक्सर कवि मन है। आकुलता भी दिखलाता है व्याकुलता कहता जाता है। सजग समर्पित हर मौके पर करता अक्सर चिंतन है। कोयल सी वाणी भी बोलें, क्रांतिकारी सी बात भी बोले। भावुक होकर व्यथित हृदय से करता क्रंदन कविमन […]