झारखण्ड से रत्ना वर्मा – दायित्व समझना जरूरी

September 5, 2018 Devendra Soni 9

“शिक्षक दिवस पर – दायित्व समझना जरूरी गुरु शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसके लिए गुरु शिष्य दोनों को-अपने दायित्व को […]

गुजरात से भावना भट्ट का खत – विद्यार्थियों के नाम

September 5, 2018 Devendra Soni 2

एक ख़त मेरे विद्यार्थी के नाम प्रिय, (बेटा/बेटी,?मित्र?) क्या संबोधन करु? द्विधा में हूँ। जब तुम मायूस होकर डबडबाई आंखों से मिलते थे तब तुझ […]

छत्तीसगढ़ सरगुजा से गीता द्विवेदी का संस्मरण – शिष्यों के श्रद्धा भाव से अविभूत हुई

September 5, 2018 Devendra Soni 1

संस्मरण श्रद्धा भाव से अविभूत हुई गुरु के प्रति शिष्य के हृदय में श्रद्धा भाव का होना स्वाभाविक है । और यदि बचपन से ही […]

कर्नाटक से मदालसा तिवारी का संस्मरण – शिक्षक एक भाग्य विधाता

September 5, 2018 Devendra Soni 0

संस्मरण शिक्षक, एक भाग्य विधाता बात उन दिनों की है जब मेरी उम्र पाँच-छह साल की होगी। हमारा परिवार स्त्री शिक्षा का विरोधी था इसलिए […]

बिहार बेगूसराय से रंजना सिंह का लेख – शिक्षक और चुनौतियां

September 4, 2018 Devendra Soni 0

शिक्षक दिवस पर विशेष – शिक्षक और चुनौतियाँ किसी भी राष्ट्र का आर्थिक,सामाजिक,सांस्कृतिक विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है।वास्तविक रूप में ज्ञान […]

सागर , मध्यप्रदेश से डॉ. के. कृष्ण राव का संस्मरण – ऐसे समझा वह शिक्षा का महत्व

September 4, 2018 Devendra Soni 1

N संस्मरण – …ऐसे समझा वह शिक्षा का महत्व शिक्षा क्यो । मैंने अपने खेतिहर मजदूर से अनायास पूछा । तुम्हारे बच्चे किस क्लास में […]

बेगूसराय बिहार से रंजना सिंह ” बीहट ” का आलेख – ज्ञान की ज्योति हैं शिक्षक

September 4, 2018 Devendra Soni 0

आलेख – ज्ञान की ज्योति हैं शिक्षक हर साल पूरे भारत में शिक्षक दिवस 5 सितम्बर, को मनाया जाता है। वास्तव में, 5 सितम्बर, डॉ. […]

विविध में छत्तीसगढ़ रायपुर से इंदिरा तिवारी का लेख – श्री कृष्ण अवतार

September 3, 2018 Devendra Soni 2

लेख कृष्णावतार जब दुराचारियों से त्रस्त होकर सारे देव एवं पृथ्वी माता ने रक्षा की गुहार की तब आकाशवाणी हुई- यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति […]

विविध में धार , मध्यप्रदेश से वन्दना दुबे का आलेख – वर्तमान में श्री कृष्ण विचारों की प्रासंगिकता

September 3, 2018 Devendra Soni 0

? * वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भगवान श्रीकृष्ण के विचारों की प्रासंगिकता * कहते हैं राजनीति में छल ,कपट और मात सब कुछ जायज है। […]