Devendra Soni January 27, 2020

” मेरी देश की मिट्टी ” ~~~🇮🇳~~~ मेरी देश की मिट्टी चंदन है, मेरी देश की मिट्टी! मेरी देश की नदियाँ प्रेमअनुराग की बंधन हैं, मेरी देश की मिट्टी पवित्र तिलक चंदन है…! ~~~🇮🇳~~~ मेरे देश का तिरंगा ध्वज मेरा गौरव गाथा वंदन है, मेरी देश की मिट्टी पवित्र तिलक चंदन है…! ~~~🇮🇳~~~ मेरे देश […]

Devendra Soni January 27, 2020

क़ाबिलियत इन्सान से काबिल कौन सा जीव है यहाँ , फिर भी इन्सान से नाकाबिल कौन है यहाँ , हर स्तर और महकमे पर वर्चस्व हासिल कर के , इन्सान कर रहा अपनी क़ाबिलियत साबित यहाँ , पर लालच ख़ुदगर्ज़ी ने बनाया इन्सान को मतलबी, कर रहा नादानियों भूल कर वो क़ाबिलियत यहाँ , कुछ […]

Devendra Soni January 27, 2020

आहट पर तीन मुक्तक गूंजती है आजतक आहट कोई ! कल्पना के खोलता है पट कोई! देखता हूँ जब किसी घर-द्वार को, याद आती है मुझे चौखट कोई! कान कहते हैं बहुत दिन हुए खट-खट तो हो! कल्पना-कूप है पर सत्य का पनघट तो हो! हृदय आकुल है सतत,दर्श को व्याकुल हैं दृग, मैं प्रतीक्षक […]

Devendra Soni January 27, 2020

लक्ष्मण उर्मिला प्रेम प्रसंग उर्मिला उर मिला खिलखिलाने लगी। साथ प्रीतम के सुख वो मनाने लगी।। मन मयूरी मुदित नाचती झूम के, गीत खुशियों भरे गुनगुनाने लगी।। थी विरह अग्नि जो हिय में जल रही, तृप्ति के जल से उसको बुझाने लगी।। आग था लगाता जो पपीहा अब तक, टेर वो उसकी मन को लुभाने […]

Devendra Soni January 27, 2020

” बाल कथा समझ “ जूगनी अपने तीन साल के बेटे मोनू को पीठ में बांध कर काम पर निकल जाती थी। ठंड अपने चरम सीमा पर था ।सबका बुरा हाल था पर गरीब का पेट कैसे भरता उसे तो रोज काम पर आना ही था । जिस घर में वह काम पर जाती थी […]

Devendra Soni January 27, 2020

कवि की यात्रा मैं क्या था मुझे मालूम नही लोग कहते थे जिसे बहुत बुरा या सबसे बुरा मैं वो था एक उम्मीद थी की कोई आएगी कभी जो मुझे बुरा , सबसे बुरा नही सबसे अलग समझेगी दर्द को , ख्वाहिशें को , खुशियों को सपनों को , कल्पनाओं को लिखने वाला था मैं […]

Devendra Soni January 27, 2020

मै और हम मै, की हम कौन है अहम हम नहीं मै हूँ अहम दूर करो जल्द यह वहम मै में झलकता है अभिमान हम से ही बनता स्वाभिमान मै का है बहुत ही सीमित संसार हम से ही होता जगमग संसार मै दिखाता है रिश्तों मे भी एक फासला हम है तो दिखता है […]

Devendra Soni January 27, 2020

वापसी:महेश राजा कैब आ चुकी थी।मांँ-बाबूजी वापस जा रहे थे।वे गांव से पंद्रह दिनों के लिये शहर आये थे।बाबूजी की तबियत खराब रहती थी तो एक बड़े अस्पताल में सारे चेकअप करवाकर दो माह की दवाई ले ली थी।उन्हें बुरा लग रहा था,पर मां-बाबूजी को गाँव में रहना ही माकूल लगता था। उन्होंने मांँ और […]

Devendra Soni January 27, 2020

मैं सच कह दूं…। मैं चोर तो नहीं। पर आंखों से सपने चुराती हूं। मैं दिलचस्प नहीं पर दिलदार कहलाती हूं। मैं सरफरोश नहीं पर सरेआम जाबांज कहलाती हूं। मैं लिखना तो ज्यादा नहीं जानती। पर अपनों के दर्द पहचानती। मैं काव्य की रचना हर रोज नहीं करती। नये भावनाओं के संग बह जाती। करुं […]

Devendra Soni January 27, 2020

सधुक्कड़ी-समाधान मैने एक दिन महाराज(स्वामी चेतनानन्द जी)से पूँछा- महाराज, आदमी के जीवन में तनाव और परेशानियां बहुत हैं।जीवन शान्त और सुखी हो, इसका सरल उपाय बतलाने की कृपा करें। महाराज अपनी ठेठ बुन्देलखण्डी में बोले:- एक गांव में ५/६आदमियन ने बदरीनाथ धाम जावे की सोची।गांव के एक चमार ने कई-“हमें संग में लै चलो,आपकी सेवा […]