उदयपुर,राजस्थान से ज्योति कविश सोनी की नई कविता – खुद परमेश्वर बन गये ..

खुद परमेश्वर बन गये ..

खुद परमेश्वर बन गये ..
मुझे अर्धांगिनी बना दिया..
सबकुछ बाट लिया ..
आधा-आधा..
अधिकार सारे तुम्हारे ..
कर्तव्य सारे मेरे हिस्से..
ऐसा फरमान सुना दिया ||
तुम्हारी जरुरतों का नाम मैं..
मेरी उपलब्धियों की मोहर तुम..
घुट- घुट पानी सा ..
मुझमे खुद को समा दिया ||
हो कोई भी खुशी मेरी ..
मुस्कान तेरी ही हो ..
मेरे गमो को फिर..
बहाना मेरा बना दिया ||
घर तेरा ,परिवार तेरा ..
जिम्मेदारी मेरी निभाने की..
मुखिया की पगडी़ बांधे सर..
मुझे लाज का घुंघट ओढा़ दिया ||
खुद परमेश्वर बन गये…
मुझे अर्धांगिनी बना दिया !!!!!

*** स्वरचित **

** ज्योति कविश सोनी **
( उदयपुर राज.)

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