अम्बिकापुर से अर्चना पाठक की कविता – वसंत

बसंत
——–

बसंती पवन पिया से मिल आई ।
मिलन की लगन जिया में लहराई।

दूर जहाँ बसेरा हो।
प्यार पे न पहरा हो।
तीव्र पवन पुरवइया ने
तन की खुश्की बढ़ाई ।
बसंती पवन पिया से मिल आई।
बड़ी बावरी बड़ी मस्त मौला
बहुत घूमी गांव पहर दोपहर
अब चली इठलाती बलखाती नगर
नदी खेत पोखर याद आने लगे ।
किनारे भी उसके मुंह चिढ़ाने लगे।
खेतों के होंठ फट से गए ।
लाली चुनर टेसू के फूलों से भर गए।
कोयल की कूक जगाये दिल में हूक।
महुए की चिपचिपाहट से भरी गोद धरती की।
एक मधमाती खुशबू से महकाती बदन धरती की।
ख्वाबों के चेहरे से खरोंच के निशान भरने आई।
बसंती पवन पिया से मिल आई।
एहसास लंबी आहों से फूलों के गालों की लालिमा बढ़ाई ।
बसंती पवन पिया से मिल आई ।
हवा की पदचापों से चिड़ियों की चहचहाटों के संगीत की
फगुनाई ।
बसंती पवन पिया से मिल आई ।
तितलियों के रंग भौरों के शब्द से छेड़ते हुए तान की मधुराई।
बसंती पवन पिया से मिल आई ।

– अर्चना पाठक ‘निरंतर ‘
अम्बिकापुर
सरगुजा
छत्तीसगढ़

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