गुड़गांव से डॉ. सोनिल सिंह की कविता – बेटियों से ही घर रोशन

बेटियों से ही घर रोशन

मैं, मेरी माँ और मेरी नानी
हम तीनों की है ये एक कहानी।
जब घरों में होता था थोड़ा दाना पानी
तब मेरी नानी ने जनि 6 6 रानी।।1

छटी रानी के बाद आया जब बेटा
तब माँ की पीठ को सभी ने ठोका।
घर में संतान को लेकर आई
जनि उसने भी 3 बेटी,जब हो गई पराई।

तीन बेटी बाद जब नानी ने उन्हें टोका
चाहने लगी वो भी अपनी सास के लिए पोता।
भगवान को सारे छप्पन भोग लगाई
तब जाके बहनों को मिला एक भाई।।

दो बेटियों को ब्याह दिया,जब उनकी घड़ी आई
तब माँ को बहुत चिंता सताई।
भगवान ने अपनी लीला यूं दिखाई
दोनो बेटी पहला नाती लेकर आई।

कैसी प्रभु की लीला है
कैसी दुनिया सयानी।
लड़की खुद ही चाहे
वो जने न जनानी।

लेकिन बदला है वक्त और
बदली है बहार।
बेटियों से ही घर रोशन है
हर घर है त्यौहार।
– सोनिल सिंह, गुडगांव

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