सूरजपुर से अनसूईया झा की कविता – तेरा इश्क मेरी इबादत है

तेरा इश्क मेरी इबादत है

तेरा इश्क मेरी इबादत है ,
तेरे इश्क के बिना जिंदगी
जीना न मुमकिन है ,
तेरा इश्क मेरा फितूर है (जुनुन)
हर पल रोज मेरे ख्यालो में
ख्याब में आ जातो हो
तेरा इश्क मेरी इबादत है ,
तेरा इश्क मेरी सुफियाना है,!
तेरे इश्क मेरी इबादत है ,
तेरे इश्क के लिए जमाने से
लड़ जाऊगीं ,
लोग पत्थर फेकेगें तो फूल समझ लेगें ,
सरे राह सूली पर चड़ा दिये जाये तो ,
खुशी से इजाजत है तेरे इश्क
के लिए !
मैं आऊ नआऊ तेरे ख्याल जेहन में ,
पर तेरा इश्क मेरा जुनून है ,
इबादत है ,
दुआ मॉग लूगी खुदा से ,
इश्क के लिए खुद के
लिए ,
इश्क खुदा है आज अनु जमाने को कह जायेगें

– अनुसुईया झा ,सूरजपुर

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