आगरा से सर्वज्ञ शेखर का आलेख – शारदा घोटाला आखिर है क्या?

*शारदा घोटाला आखिर है क्या?*

आफिस का ऑडिट हुआ । एक बड़ी त्रुटि पाई गई कि करीब सौ खातों में ब्याज गलत लगी थी । आफिस से ऑडिट वालों को जवाब दे दिया गया कि सम्बंधित अधिकारी अवकाश पर है, उनके जॉइन करते ही त्रुटि सुधार दी जाएगी । ऑडिट रिपोर्ट इस त्रुटि को सुधारे बिना बन्द नही हो पा रही थी,अतः ऑडिट आफिस से बार बार पूछा जाता रहा कि क्या सम्बंधित अधिकारी ने जॉइन कर लिया ? अब पत्र व्यवहार अधिकारी की जोइनिंग तक सीमित रह गया । एक दिन ऑडिट आफिस को जवाब मिल गया कि सम्बंधित अधिकारी ने जॉइन कर लिया, यह सूचना आते ही ऑडिट रिपोर्ट बन्द हो गई । सौ खातों में गलत ब्याज लगने को सुधारने की बात गौण हो गई,उधर किसी का ध्यान ही नही गया ।

प.बंगाल में आजकल ऐसा ही हो रहा है । कोलकता के पुलिस कमिश्नर को अरेस्ट किया जाए या बातचीत के लिए बुलाया जाए या ममता दीदी को धरना समाप्त कर देना चाहिए या नही,सारी बात यही आ कर अटक गई है । इससे आगे अब यह बहस चल रही है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस कमिश्नर को सी बी आई के सामने पेश होने का आदेश ममता की जीत है या हार ? लेकिन इस सबके पीछे जो शारदा चिट फंड घोटाला है, जिसमें करीब बीस लाख लोग ठगे गए उसकी चिंता किसी को नही है ।

शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है, जिसमें कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का हाथ होने का आरोप है । दरअसल पश्चिम बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप ने आम लोगों के ठगने के लिए कई लुभावन ऑफर दिए थे । इस कंपनी की ओर से 34 गुना रकम करने का वादा किया गया था और लोगों से पैसे ठग लिए ।

चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए।
इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं। नियम के मुताबिक ये स्कीम किसी संस्था या फिर व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है लेकिन अब चिट फंड के स्थान पर सामूहिक सार्वजनिक जमा या सामूहिक निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका ढांचा इस तरह का होता है कि चिट फंड को सार्वजनिक जमा योजनाओं की तरह चलाया जाता है और कानून का इस्तेमाल घोटाला करने के लिए किया जाता है।

बताया जाता है कि इस घोटाले में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का हेर-फेर हुआ है । साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को जांच का आदेश दिया था । साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को आदेश दिया था कि वे सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करें ।

इस कंपनी की स्थापना जुलाई 2008 में की गई थी । हालांकि देखते ही देखते ये कंपनी हजारों करोड़ की मालिक बन गई । आरोप लगाया जाता है कि इस कंपनी के मालिक सुदिप्तो सेन ने ‘सियासी प्रतिष्ठा और ताक़त’ हासिल करने के लिए मीडिया में खूब पैसे लगाए और हर पार्टी के नेताओं से जान पहचान बढ़ाई ।

शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई जांच के घेरे में हैं । दरअसल राजीव कुमार ने ही चिटफंड घोटालों की जांच करने वाली एसआईटी टीम की अगुवाई की थी । साथ ही कहा गया था कि इस जांच के दौरान घोटाला हुआ था । इस कमेटी की स्थापना साल 2013 में की गई थी । सूत्रों के मुताबिक घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइल और दस्तावेज गायब हैं । वहीं सीबीआई गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करना चाहती है । साथ ही सीबीआई ने पुलिस कमिश्नर को फरार बताया था ।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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