धनबाद से अभिजीत दूबे का व्यंग्य आलेख – भैया बिहारी और आई ए एस की तैयारी

व्यंग्य
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भैया बिहारी और आई ए एस की तैयारी

पूरे मुहल्ले में खबर फैल चुकी है कि, लटकन चाचा का बेटा राजू आई ए एस की तैयारी करने दिल्ली जा रहा है । एक-एक करके मुहल्ले के लोग लटकन चाचा से मिलने के बहाने राजू को नसीहत देने आना शुरू कर चुके हैं। आंगन के बीचोबीच तुलसी चौरा यानि कि तुलसी के पौधे का चबूतरा है। तुलसी चौरे के चारो ओर मण्डली जम चुकी है। आंगन के कोने में चाची गोयठा का ढेर लगाकर लिट्टी बनाने की तैयारी कर रही है । एक झोला ठेकुआ पहले ही बन चुका है। बेटे के परदेश जाने को लेकर चाची थोड़ा आशंकित हैं, पर लटकन चाचा के चेहरे पे गर्व का भाव है।
चुनचुन चाचा ने राजू को समझते हुए कहा – ‘ खूब मन लगाकर पढ़ना, तुमसे हम सबको बहुत उम्मीद है। आजकल सुनते है मुखर्जी नगर में , बिहारी छात्रों को पकड़ पकड़कर पीट रहे हैं , किसी दूसरे मुहल्ले में रहना। कीर्ति नगर में रूपेश बाबू का बेटा भी रहता है, पर उसके चक्कर में मत पड़ना। ससुर का नाती, सात साल से कौन सी तैयारी किए जा रहा है कि प्रिलिम्स तक नहीं निकाल पाया ।
‘ बेटा दिल्ली स्टेशन पर उतरकर थोड़ा सावधान रहना । पंजाब और हरियाणा वाले ट्रक लेकर भैयों के इंतज़ार में खड़े रहते हैं। ट्रैन आई, भैयों को ट्रक में लादा और चलते बने अपने खेतों में काम करवाने’ । – झुन्ना चाचा ने समझाया।
चाची यूं तो जेठ के सामने मुँह नहीं खोलती थीं, पर तमतमाते हुए घूंघट की ओट से बोलीं – ‘ मेरा बेटा का उम्र, इतना थोड़े न हो गया है कि दिल्ली वाला सब इसको भैया बोलेगा ‘।
‘ अरे नहीं बहु। जिस तरह अंग्रेज लोग हम भारतीयों को रायबहादुर, चौधरी आदि पदवी देते थे, ठीक उसी तरह पंजाब, हरियाणा वाले हम बिहारियों को ‘भैया’ पदवी दिए हैं। सम्मान है बहु सम्मान , भैया गाली थोड़े ही ना है ‘ ।
‘ उ त सब ठीक है जेठ जी, मेरा बेटा आई ए एस का तैयारी करने जा रहा है और आप भैया, पंजाब, खेत में काम ना जाने क्या-क्या बड़बड़ा रहे हैं । मतलब क्या है आपका’ ? – चाची ने मन की भड़ास निकाली ।
‘ मतलब-उतलब के चक्कर में मत पड़ो बहु। गर्व करो कि हमारा राज्य आई ए एस भी निकालता है और पूरे देश को लेबर भी सप्लाई करता है। इ लेबर सब हर महीने मनीऑर्डर करता रहता है तो घर में चूल्हा जलता रहता है। मनीऑर्डर इकोनॉमी इन्हीं लेबर भाइयों की देन है । अब ऐसे में बाहर वाले सारे बिहारियों को लेबर मानने लगे तो क्या गुस्सा करना’ ?
‘ देखो भाई , हम गंवई लोग है । हमें कोई लेबर समझ ही सकता है, उनको दोष देना ठीक नहीं ‘ – लटकन चाचा ने कहा।
‘ उनका कोई दोष नहीं है , पूरा का पूरा देश ही हम बिहारियों को कार्टून समझता है । लेकिन इ लोग बिहारी के प्रतिभा को नही जानता है। और अगर जानता है तो मानता नहीं है और अगर मानता भी है तो कम से कम सार्वजनिक रूप से स्वीकार तो हर्गिज नहीं करना चाहता है। हम बिहारी लोग हैं बिहारी, अभाव में भी हम मस्त रहते हैं। बाढ़ से तो हर साल हमारी आँख मिचौली होती है, पर मजाल है जो पिछले पचास सालों में हमने एक भी नया बांध बनवाया हो। मजाल है हमारा जो हमने कभी भी केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा मांगा हो, विशेष आर्थिक पैकेज मांगा हो । हमारा तो स्पष्ट मत है -जाही विधि राखे राम , ताहि विधि रहिए । आजादी के बाद से ना जाने कितने रेल मंत्री इस राज्य ने दिए , पर मजाल है जो राज्य कि रेल व्यवस्था सुधरी हो , ट्रेनों की संख्या बढ़ी हो। हम संतुष्ट कौम हैं। एक -दो ट्रेनों में ही भेड़-बकरियों की तरह लदकर अपना काम निकाल लेते है, राष्ट्र पर बोझ नही डालते। हम समाजवाद के सिद्धांत पे विश्वास करते है। पशुओं का चारा तक आपस में मिल-बांटकर हजम कर जाते हैं ‘ – गुड्डु चाचा ने एक साँस में इतना कुछ उड़ेल डाला।
लेकिन चाची लिट्टी में सत्तू भरते – भरते कुछ और ही बुदबुदा रही थी- अपना रूम पार्टनर अपने जात वाला को ही बनाना, दूसरा जात वाले के साथ रहकर अपना धर्म भ्रष्ट करने की जरूरत नही है। और सुनो शादी-बियाह तो हम दूसरा जात में एकदम्मे नहीं करेंगे, सोच-समझकर वहाँ के लइकियन सबसे दोस्ती करना। हमको सब पता है, वहाँ के लइकी सब बहुत्ते फारवर्ड होती है, कमरा तक पे आना शुरू कर देती है। देख रहे हो न अविनाश जी के छोरे को, आई ए एस तो बन गया , पर पंजाबन बहु लेकर आ गया। बिरादरी में नाक कटवा दी। ध्यान रखना अपने कास्ट से बाहर शादी करोगे तो मेरा मरा हुआ मुँह देखोगे।
‘चाची आप जात-पात मानती हैं ‘ ?
अरे मेरे नहीं मानने से क्या होगा ? जाति प्रथा आज से थोड़े ही है हमारे समाज मे , सदियों से है । हमने तो नहीं बनाया ? इस जाति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरा का पूरा बिहार एकजुट रहता है। और किसी भी विषय पे हम बिहारी सिरफुटव्वल कर लें , पर इस विषय पे एकमत हैं हम। मजाल है किसी की जो इस व्यवस्था को तोड़ सके। इम्पॉसिबल, इम्पॉसिबल ‘ ।
देखो बेटा मैट्रिक में तुम पूरे जिले के टॉपर हो। तुम्हारे मार्क्स का कोई मजाक उड़ाए तो लड़ना-झगड़ना मत। तुम्हारे मेरिट पे पूरा भरोसा हम सबको है। बेटा पूरा का पूरा देश ही हमारी शिक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाता है। इसमें देशवालों की जरा-सी भी गलती नही है। इ तो पत्रकार लोग परीक्षा केंद्र से ‘लाइव फ्रॉम काऊ बेल्ट ‘ टेलीकास्ट करके हमलोगों के इमेज का बंटाधार कर दिया है। – गागुल चाचा ने अपनी बात रखी।
पाँचवी कक्षा में पढनेवाले बालेश्वर चाचा के बेटे निकेत ने उत्सुकतावश एक प्रश्न ठोक डाला- ‘ चाचा सबसे बड़ा नौकरी क्या आई ए एस का ही होता है?
अरे नहीं बेटा, इससे ऊपर के भी पोस्ट जनसेवकों के होते हैं और इस ऊँचे पोस्ट पे जब बिहारी जाता है तो आई ए एस , आई पी एस तक से खैनी लेटवा लेता है – सोमनाथ चाचा ने समझाया।
लेकिन इन बतकहियों से भिन्न राजू के मन में कुछ और ही चल रहा था। वह बोल पड़ा- बाबूजी हम दिल्ली नहीं जाना चाहते । यहीं रहके तैयारी करेंगे।
‘थेथरलॉजि बंद करो अपना। यहाँ क्या तुम्हारा अपहरण उद्योग में कैंपस सेलेक्शन हो जाएगा। और वो भी तो आजकल बंद है ‘।
लटकन चाचा को गरमाते देख, बीच बचाव में कारू काका कूदे– ‘ बेटा आई ए एस की तैयारी के लिए मक्का- मदीना है दिल्ली । दिल्ली जाने पे अपने को थाह पाओगे, अपने लेवल का पता लगेगा तुमको। अंग्रेजी बोलने का प्रैक्टिस भी दिल्ली में अच्छा हो जाएगा ‘ ।
राजू अडिग रहा- मैं पटना में तैयारी कर लूंगा ।
अब तो लटकन चाचा के तरवा का गर्मी कपार पर चढ़ गया।
— बकलोल कहीं का । बारहवीं में साइंस लिए थे। आई आई टी का कोचिंग करवाए थे, पटना के सबसे बड़े कोचिंग में। लाखों खर्च किए तुमको इंजीनियर बनाने के लिए, तुम नहीं बन सके । हमने कुछ नहीं कहा । अब चुपचाप दिल्ली जाओ और आई ए एस बनके ही लौटना । यहाँ रहके कुछ नहीं होगा। राजेन्द्र प्रसाद रोज-रोज जीरादेई में नहीं पैदा होते हैं। यहाँ पटना में रहकर रोज-रोज रैली और जुलुस निकालोगे गाँधी मैदान से । पढ़ने-लिखने का मन नहीं है तो बता दो हमको , पान का गुमटी खोलवा देते हैं और चार ठो भैंस खरीद देते हैं तुमको। यहीं रहके गोबर पाथते रहना।
अचानक लाइट चली गई। लटकन चाचा ने फिर राजू कि ओर मुखातिब होकर कहा- देख रहे हो न, बिजली तक नहीं रहती। लालटेन और ढिबरी के रौशनी में पढ़कर पूरे देश के छात्रों से टक्कर लोगे ?
दादी सब कुछ चुपचाप सुन रही थी । राजू के पास जाकर धीरे से गाल पे थपकी दी। जा चल जा बेटा, पर लगन के दिन में घर मत आना, नहीं तो किडनैप करके बियाह कर देगा सब। मरने से पहले तुम्हारा तिलक देख लेना चाहते है हम ।
राजू अब जाने को विवश हो चुका है। उमा चाचा रेडियो लेकर आंगन में प्रवेश करते है। रेडियो पे गाना बज रहा है-अस्सीए में करके मैट्रिक पास,
बबुआ हमार ,कम्पटीशन देता।

– अभिजित कुमार दूबे
धनबाद

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