आगरा से सर्वज्ञ शेखर का आलेख – राजनीति का कुम्भ स्नान

*राजनीति का कुम्भ स्नान*

प्रयागराज में पवित्र कुम्भ समागम चल रहा है । मेरे मन में एक जिज्ञासा हमेशा रहती थी कि साधु संतों को पतित पावनी गंगा में स्नान की क्या जरूरत है ? गंगा तो पतितों पापियों बीमारों को उनके पापों रोग शोक से मुक्ति कराती है, अपनी भूलों व दुष्कर्मों का प्रायश्चित करने का एक जरिया है ।

काफी प्रयास करने और बहुत ढूंढने पर एक पौराणिक कथा से ज्ञात हुआ कि गंगा जी एक बार बड़े दुखी मन से ब्रह्मा जी के पास पहुची और बोली, हे प्रभु सारी दुनियां के पापी मेरे अंदर स्नान करके अपने पाप धो जाते हैं, रोगी अपनी बीमारियों का मेरे अंदर त्याग कर जाते हैं, शव दाह या शव प्रवाह करके यहां ही लोग मोक्ष पाते हैं । इस प्रक्रिया में मैं बहुत मैली गन्दी हो गई हूं । मेरी पवित्रता निर्मलता शनै शनै कम होती जा रही है । कुछ उपाय कीजिये । मेरे ऊपर कृपा कीजिये ।

गंगा जी के विचारों से सहमत होते हुए ब्रह्मा जी ने कहा ,ठीक है, एक व्यवस्था करते हैं । अब से हर बारह साल की अवधि में गंगा तट पर कुम्भ मेला का आयोजन होगा । इस अवसर पर साधु सन्यासी संत गंगा स्नान करेंगे । उनके स्नान करने से साधु संतों की सारी तपस्या का फल गंगा में प्रवाहित हो जाएगा, उनके शरीर पर धारण किये हुए रुद्राक्ष,भभूती ,चंदन व अन्य पवित्र सामग्री का गंगा जल में मिश्रण हो जाएगा । गंगा तट पर कथा,भागवत,वेद पुराणों का पाठ होगा , हवन होंगे, चारो ओर आध्यात्म पुंज का प्रकाश होगा ।
इससे गंगा पुनः पवित्र व निर्मल हो जायेगी और अपने पुराने रूप में आ जायेगी ।

लेकिन हमारे देश मे तो कोई विषय ऐसा नही है जहाँ राजनीति न हो । कुछ लोग राजनीति करते हैं तो कुछ को हर बात में राजनीति दिखती है । योगी जी ने उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की अधिकृत बैठक आयोजित की जो कि सामान्यतः राजधानी में ही होती है । इससे पूर्व मुख्यमंत्री जी ने सारे मंत्रियों के साथ कुम्भ में डुबकी लगाई । अपने आपको बहुत ज्ञानी समझने वाले थरूर साहब ने इस पर भी विवादास्पद टिप्पणी कर के कुम्भ में राजनीति को शामिल कर दिया । कुछ लोग यह देखते रहे कि मुख्यमंत्री और मन्त्रियों में से कितनों ने जनेऊ पहना था और कितनों ने नही ?

साधू संत भी ,ऐसा लगता है कि राजनीतिक रूप से बंटे हुए हैं । कोंग्रेस समर्थित माने जाने वाले साधुओं ने धर्म संसद करके राम मंदिर मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की तो आर एस एस समर्थित साधुओं ने दूसरी धर्म संसद करके सरकार की हा में हां मिलाते हुए प्रस्ताव पास किये ।

इस बार कुम्भ में कुछ लोगों को भीड़ भाड़ कम लग रही है । वास्तव में व्यवस्था ऐसी चुस्त दुरुस्त है और क्षेत्र इतना बड़ा है कि भीड़ होते हुए भी महसूस नही हो रही । करें भी क्या सभा,रैली, मेलों, गोष्ठियों की सफलता का पैमाना अब भीड़ ही हो गया है । अब कुम्भ में भीड़ बढाने के लिए तो लोगो को जबर्दस्ती या पैसे दे कर बसों में भर कर तो ले जाया नही जा सकता सभाओं की तरह।

कुछ दिनों पूर्व एक शादी समारोह में मैं गया । सब कुछ बड़ा कूल कूल से था , गोलगप्पे के स्टाल पर भीड़ नही थी,चपाती के लिए इंतज़ार नही करना पड़ रहा था,पंजाबी स्टाल पर लोग खाट पर बैठ कर आराम से मक्का की रोटी सरसो का गुड़ और माखन के साथ खा रहे थे । लग रहा था कि लोग कम आये हैं । पर ऐसा था नहीं । आयोजन बहुत बड़े फार्म हाउस में था इसलिए सब कुछ व्यस्थित था, यही किसी छोटे से मैरिज हाल में होता तो लोग एक दूसरे पर गिरे पड़ रहे होते,कुछ के मोबाइल और कुछ के पर्स ,किसी की चेन गायब हो जाती या लोंग गायब हो जाती।
प्रयागराज के कुम्भ के बारे में भी बिल्कुल ऐसा ही है ।

एक बात और,जो लोग किसी भी कारण से कुम्भ स्नान करने नही जा पा रहे हैं, वह पर्व स्नान की तिथियों में अपने घर पर रखे पवित्र गंगा जल को बाल्टी के पानी मे मिला कर हर हर गङ्गे के उच्चारण के साथ नहा लें ।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
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