आगरा से सर्वज्ञ शेखर का लेख – क्या लोकसभा और सभी विधानसभाओं के एक साथ चुनाव सम्भव हैं?


लेख –

क्या लोकसभा और सभी विधानसभाओं के एक साथ चुनाव सम्भव हैं?

लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की बहस सत्ताधारी हलकों ने काफी पहले ही शुरू कर दी थी , परंतू हाल ही में कुछ सभाओं में अपने भाषण में प्रधानमंत्री जी ने लोकसभा और विधान सभा के चुनावों को एक साथ कराने की इच्छा का इज़हार करके इस विषय को ताज़ा कर दिया है । यद्यपि अब तो लोकसभा चुनाव सर पर आ गए है परन्तु ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार इस दिशा में गम्भीर है । फिर भी चार राज्यो झारखंड,महाराष्ट्र , हरियाणा और जम्मू कश्मीर के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे ।

विपक्ष का मानना है, और भाजपा के एक वर्ग को भी लगता है कि मोदी लहर का लाभ उठा कर राज्यों में अपनी सरकारें बना ली जाएं । खर्चा कम होना या बार बार आचार संहिता लगने से विकास कार्यो में बाधा होने की बात कहना तो एक बहाना है । ये बात तो संविधान निर्माताओं ने भी सोची होगी । पर् कोई तो ऐसी विवशता होगी कि संविधान में ऐसी व्यवस्था पहले नहीं हो पाई ।

इसके मुख्य कारण ये हैं-
1.हमारे देश का संघटनात्मक ढांचा औऱ विविधता विचारों में मत भिन्नता को मान्यता देता है जो कि लोकतंत्र का मजबूत मानक है । पार्षद और मेयर के चुनाव एक साथ होते हैं परंतु अक्सर हो जाता है कि जनता एक ही क्षेत्र में पार्षद किसी को और मेयर दूसरे दल के प्रत्याशी को चुनती है । लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद दिल्ली विधान सभा में भाजपा का क्या हाल हुआ सभी जानते हैं । इसलिये यह जरूरी नहीं कि एक साथ चुनाव होने पर् जनता लोकसभा और विधानसभा में एक ही दल को जिताये जैसा कि भाजपा सोचती है ।
2. मान लिया एक साथ चुनाव का नियम बन गया और चुनाव होने पर् एक साथ लोकसभा और विधान सभाओं का गठन हो गया । अब यदि अचानक किसी विधानसभा में अचानक सत्ताधारी दल बहुमत खो देता है और कोई दूसरा दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, तब क्या होगा । अभी तो दुबारा चुनाव करा के नई विधानसभा बन जाती है । परंतु एक साथ चुनाव की स्थिति में क्या उस विधान सभा को स्थगित रखा जाएगा, लम्बी अवधि तक राज्यपाल का शासन रहेगा । ऐसे संवैधानिक संकट का उपाय खोजना होगा जो आसान नहीं है ।

3.इसी प्रकार यदि लोकसभा 5 वर्ष पूर्व ही किसी कारण से भंग हो जाती है तो मध्यावधि चुनाव कैसे होंगे , या राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा ।

4.केंद्र और राज्यों के सम्बंध मालिक और नोकर के नही है कि सारे राज्यो में एक ही पार्टी की सरकार हो तभी केंद्र का राज्यों पर् नियंत्रण रहता है । पिछले 67 वर्षों से संघीय व्यवस्था सुचारू चल रही है ।

5,.एक साथ चुनाव होने पर् चुनाव आयोग और सुरक्षा कर्मियों पर् जो दवाब होगा उसकी भी कल्पना करनी चाहिए ।

*सर्वज्ञ शेखर गुप्ता
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा, आगरा
9643015966

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