अहमदाबाद, गुजरात से संध्या चतुर्वेदी का लेख – आस्तीन के सांपों से डर लगता है

लेख –

आस्तीन के सांपों से डर लगता है ।।

ना हिंदुस्तान में डर लगता है ,ना पाकिस्तान में डर लगता है ।
डर लगता है तो हमें आस्तीन के सांपो से डर लगता है क्योंकि यह साँप हमारे ही तो पाले होते हैं।जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं।
जिसे देखो एक होड़ सी मची हुई है ।जिस मुल्क और वतन में पल के बड़े होते हैं ।उसी में रहने से आज इन बुजुर्गों को डर लगता है और लगे भी क्यों नहीं शायद कहते हैं ना कि बुढ़ापे पर नहीं किए हुए पाप सभी को याद आते हैं और फिर उन्हें मरने से डर लगता है। यही हाल इन पाक बनने वाले बुजुर्गों का है ,जिन्हें बुढ़ापे में अपने मुल्क अपने वतन से डर लगता है।
आजकल भारत कद दो नागरिक को यह कहते सुना जा रहा है कि, हमें अब भारत में रहने से डर लगता है ।मेरा मानना है कि ऐसे लोगों को अफगानिस्तान या पाकिस्तान भेज देना चाहिए ।जहां इन को दहशत क्या होता है पता चलेगा ।जो लोग बंदूक की नोक के नीचे किस तरह से अपना बच्चों के जीवन के अस्तित्व को झोक रहे हैं ।उनका दर्द क्या होता है ?उन्हें कैसे डर लगता है ? ये वही जान सकता है जो उस खोफ में जिंदा रहता है। मेरी निजी राय है ,कि ऐसे लोगों को देश से बेदखल कर देना चाहिए और बताना चाहिए कि डर क्या होता है?
पुरानी कहावत है , “नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली “।इन जनाब को हज को जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि हज जैसी पाक जगह तो पवित्र लोग जाते हैं ।ये जो अपने पाप धोते समय, अपने आका को याद करते हैं और इन्हें अपने वतन में डर लगता है ।
इन को तुरंत देश से निष्कासित कर देना चाहिए क्योंकि यह एक सबसे बड़ा देशद्रोह है ।
अगर हमें उस देश में रहने से डर लगता है ,तो हमें उस देश के नागरिक होने का हक नहीं और ऐसा बयान देश की जनता के हित में नहीं है।
नींद नहीं आती आज इन को।
इस बयान बाजी से युवावर्ग भ्रमित हो सकता है ,इसलिए यह सबसे बड़ा देश द्रोह है और ये लोग देश द्रोही।
मुझे अपने देश में रहने से डर नहीं लगता है। इसी मिट्टी की वजह से मेरा वजूद है।मेरा देश है ,मेरा वतन ,मेरा मुल्क है और मुझे अपने मुल्क में रहने से ज्यादा सुरक्षित जगह दूसरी कोई नहीं लगती है ,कि हम हिंदुस्तानी हैं और हम हिंदुस्तानियों के जिगर में डर नाम की चीज नहीं होती हैं।
जो डरते है वो हिंदुस्तानी नही होते।।
मुझे भारत मे रहने में कोई डर नही लगता,डर लगता हैं तो इन आस्तीन के साँपो से लगता हैं।।

– संध्या चतुर्वेदी
अहमदाबाद गुजरात

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