आगरा से सर्वज्ञ शेखर का त्वरित लेख – खोखला विकास हार गया : इनकंबेंसी पर ठीकरा फोड़ना गलत

*खोखला विकास हार गया* : *इनकंबेंसी पर ठीकरा फोड़ना गलत*

पांच राज्यों के चुनावों के परिणामों से आज पुनः स्पष्ट हो गया कि दिखावे का विकास कभी जीत नही सकता । विकास की कितनी भी योजनाएं बना लीजिये ,यदि जनता को लाभ नही मिलेगा तो सत्तारूढ़ पार्टी को विजय नही प्राप्त हो सकती ।
चुनावों की घोषणा से पूर्व छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में जिस प्रकार से सरकारी खजाने खोल दिये गए उनका जनता पर कोई असर नही पड़ा और नोटबन्दी,जी एस टी ,किसानों बेरोजगारों की समस्यायों, नारी अत्याचार, अभद्र भाषण बाजी,हनूमान जी और रामचन्द्र जी की छवि का दुरुयोग विकास की खोखली योजनाओं पर भारी पड़ गये । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अंतिम क्षणों में मेहनत न की होती तो हिंदी भाषी तीनों राज्यों राजस्थान मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने तो नैया पूरी ही डूबा दी थी ।
हार हार होती है औऱ जीत जीत होती है, फिर वो एक सीट से हो या दस से । अब वोट शेयर और नए पुराने आंकड़ों के जाल पेश किए जाएंगे । सरकार बनाने की तिकड़में लड़ाई जाएंगी । पर इतना स्पष्ट है कि चारों राज्यों में जनादेश सत्ता के विरुद्ध है ।
एक बात और,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के लिये इनकंबेंसी को जिम्मेदार बताया जा रहा है । यह भी गलत है । राजस्थान में तो कोई इनकंबेंसी नही थी । प्रधानमंत्री ने सघन प्रचार किया और अपनी केंद्रीय योजनाओं के नाम पर वोट मांगे,इन योजनाओं के लिए तो कोई इनकम्बेंसी नही थी । यह कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री तो अच्छे थे पर उन का चेहरा पुराना हो गया था । ऐसा नही है । चुनाव तो मोदी जी और अमित शाह के चेहरों पर लड़े गए । उनके चेहरे तो नए और प्रभावी थे ।

एक बहुत बड़े राष्ट्रीय पत्रकार का लेख मैं पढ़ रहा था । उन्होंने बहुत बड़ी बात कही । उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भाजपा की लायबिलिटी और और भाजपा के दिग्विजय सिंह बन गए हैं । उनके आने के बाद उत्तर प्रदेश में ही तमाम भाजपा उपचुनाव हार गई । उनसे यह कैसे अपेक्षा की गई कि उनका फायरब्रांड प्रचार दूसरे राज्यों में भाजपा को जितवा देगा ।

खोखले विकास की हार पहली बार नही हुई है । 1999 से 2004 तंक एस एम कृष्ना मुख्यमंत्री थे । वहां उन्होंने जबर्दस्त विकास किया । उन्हें आधुनिक बैंगलोर का जनक माना जाता है । लेकिन फिर भी 2004 के चुनावों में कृष्णा हार गए । बड़े बड़े फ्लाई ओवर्स, कम्प्यूटर हब्स, इंजीनियरिंग कॉलेज बनवाने से जो विकास दिखता है, उसका लाभ उस गरीब जनता को नही मिलता जो रोज कुआ खोद के पानी पीते हैं । जो लाभ उठाते हैं वो वोट देने ही नही जाते या वो भी इन कामों को ज्यादा महत्व नही देते ।

इसका और भी अच्छा उदाहरण दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार है । उन्होंने दिल्ली में कितना विकास कार्य किया सभी जानते हैं, फिर भी वह हारी क्योंकि उस विकास का जनता से कोई मतलब नही था ।

आंध्र में 1994 से ले कर 2004 तंक चंद्रा बाबू नायडू ने भी चमत्कारिक कार्य किये परन्तु वह भी 2004 में हार गए । वहा भी जनता ने खोखले विकास को नकार दिया था ।

*-सर्वज्ञ शेखर*
सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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