आगरा से सर्वज्ञ शेखर का आलेख – उर्जित पटेल का आर बी आई को बाई बाई : गलती दोनों पक्षों की है


आलेख –

*उर्जित पटेल का आर बी आई को बाई बाई : गलती दोनों पक्षों की है*

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के अचानक इस्तीफे ने सरकार को हिला दिया है । सरकार और आर बी आई के बीच तकरार की खबरें काफी समय से आ रही थीं परन्तु 19 नवम्बर को बोर्ड की मीटिंग जिस सद्भाव पूर्ण माहौल में हुई और पटेल की प्रधानमंत्री से भेंट के उपरांत लग रहा था कि सीजफायर हो गया है । परन्तु आज के घटनाक्रम ने सभी को स्तब्ध कर दिया ।
घटनाओं ने जो मोड़ लिया उसके लिये मुझे लगता है गलती दोनों पक्षों की है । सरकार ने सेक्सन 7 के प्रयोग, स्वायत्तता पर प्रहार,रिजर्वस की मांग, एम एस एम ई पर ज्यादा फोकस, एन पी ए के नए नियम, ब्याज दरों में बदलाव के लिये अपनी चलानी चाही और दवाब डाला । यह गलत था । इसी प्रकार पटेल ने जिस तरह से त्यागपत्र दिया उससे सरकार और देश की छवि खराब हुई है । इतने बड़े अधिकारी को दवाब सहने और सरकार से मिल कर चलने का अनुभव होना चाहिए । उन्हें यह भी जानना चाहिये कि मज़बूरी में ही सही परन्तु उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णय का क्या त्वरित असर होगा । जिस प्रकार से इस्तीफा दिया गया उससे जाहिर हो गया कि यह निजी कारणों से नही बल्कि विवादों के चलते दिया गया है ।
पटेल को यह समझना चाहिए था कि यद्यपि आर बी आई स्वायत्त है परन्तु उसका कार्य सरकारी नीतियों के आलोक में योजनाएं बना कर उनका क्रियान्वयन करना है । प्रारंभ से यदि हम देखे तो चाहे लीड बैंक योजना हो या प्राथमिकता क्षेत्र ऋण योजना,ग्रामीण बैंकों की स्थापना हो या नाबार्ड,सिडबी । सभी सरकार की योजनाएं थी और आर बी आई उन्हें अनुपालित कर रही थी । परन्तु अभी प्रधानमंत्री ने 59 मिनिट में एम एस एम ई लोन की जो योजना शुरू की वह शायद आर बी आई को ज्यादा पसंद आई और पटेल ने ज्यादा रुचि नही दिखाई ।

मैंने मौद्रिक नीति पर अपने लेख में लिखा था कि आर बी आई को ब्याज दर कम करनी चाहिए थी ताकि जनता को मिलने वाले ऋण सस्ते हो सकें । सरकार भी यही चाहती थी ,परन्तु आर बी आई ने नही माना । सरकार की मजबूरी यह है कि वह चुनाव मोड में है । उसे लोकलुभावन योजनाओं को लाना है जो आर बी आई के बिना संभव नही है । पटेल को पहले कोई जानता नही था , प्रधानमंत्री की गुड लिस्ट वाले पटेल को जब रघुराम राजन के बाद लाया गया तो यह मान कर चला जा रहा था कि वह सरकार की उंगलियों पर नाचेंगे । यही आकलन गलत हो गया ।

संस्थाओं को कमजोर करने औऱ विवाद हो जाने पर बड़े भाई की तरह मामला न सुलझाने के लिये सरकार भी बराबर की जिम्मेदार है । वर्तमान सरकार यह भूल गई कि 2008 या उसके बाद जितने भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट आये, भारत हमेशा मजबूती के साथ खड़ा रहा क्योंकि हमारीं अर्थव्यवस्था मजबूत थी । और अर्थव्यवस्था इसलिये मजबूत है क्योंकि आर बी आई मजबूत है, हमारीं बैंकिग व्यस्था सुदृण है । इसलिये आर बी आई को ज्यादा नही छेड़ना चाहिए ।
आर बी आई गवर्नर्स ने पहले भी इस्तीफे दिए हैं । यह कोई नई घटना नही । परन्तु जिस प्रकार से औऱ जिस समय पर इस्तीफा दिया गया उसने प्रकरण को नाटकीय और कुछ कुछ प्रायोजित सा बना दिया । इन पंक्तियों के पढ़े जाने पर सांसद का अधिवेशन शुरू हो गया होगा, पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ रहे होंगे, एक दो महीनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होने वाली है ऐसे में इतना महत्वपूर्ण पद छोड़ कर घबराहट पैदा नही करनी चाहिए थी।

-सर्वज्ञ शेखर
पूर्व बैंकर

सेक्टर 5 /49
आवास विकास कॉलोनी
सिकन्दरा आगरा
9643015966
gupta.ss05@gmail.com

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