नागरिक पत्रकारिता में पढ़िए विनोद कुशवाहा का लेख- पुलिस कर रही नागरिकों से बदसलूकी

पुलिस कर रही नागरिकों से बदसलूकी

विगत् दिनों जब भारतीय जनता युवा मोर्चे के नगर मंडल ने यातायात प्रभारी जय नलवाया तथा मदन सिंह यादव को विवादास्पद बताते हुए उन पर न केवल अवैध वसूली का आरोप लगाया बल्कि युवा मोर्चे के अनेक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ स्वयं विधायक प्रतिनिधि कल्पेश अग्रवाल , नगरपालिका के सभापति राकेश जाधव , जसबीर सिंह छाबड़ा , पार्षद राजकुमार यादव , साप्ताहिक ‘ सूर्य स्तम्भ ‘ के प्रबंध संपादक एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनीष सिंह ठाकुर , युवा मोर्चे के नगर अध्यक्ष राहुल चौरे आदि ने एस डी ओ पी पुलिस अनिल शर्मा को ज्ञापन भी सौंपा तो ये कहा गया कि चूंकि कतिपय भा ज पा कार्यकर्ताओं को यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुये पाए जाने पर उनके चालान काटे गए इसलिये ये सब नाटक रचा गया । नागरिकों में भी यही संदेश गया । इस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में ये भी कहा गया कि भा ज पा के आकाओं से पुलिस को फोन भी कराए गए लेकिन पुलिस ने वाहन नहीं छोड़े । पूर्व गृह उप मंत्री विजय दुबे काकू भाई ने एक दैनिक अखबार से बातचीत में कहा कि ये दवाब की राजनीति है । मगर मैं भारतीय जनता युवा मोर्चे के नगर अध्यक्ष राहुल चौरे की इस बात से तो शत प्रतिशत सहमत हूं कि यातायात पुलिस जांच के नाम पर आम नागरिकों को बेहद परेशान कर रही है । श्री चौरे ने तो यातायात पुलिस पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है । उनका ये आरोप जगजाहिर है । रेलवे स्टेशन के सामने , पुलिस थाने के सामने , ओव्हर ब्रिज तिराहा , रिलायंस पेट्रोल पंप के पास तिराहे पर , होशंगाबाद रेलवे क्रॉसिंग से लेकर भोपाल चौराहे तक ये नज़ारा आसानी से देखा जा सकता है । कई बार तो दबिश देकर पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद अपने कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है । खैर । नागरिकों को परेशान किये जाने की शिकायत को अभी दो दिन भी नहीं हुए थे कि नगर निरीक्षक स्वयं लगभग एक दर्जन पुलिस के जवानों के दल बल के साथ रात्रि 8 बजे के करीब शांति भवन के तिराहे पर वाहनों की जांच के लिए खड़े हो गए । घण्टों नागरिकों के साथ अपराधियों की तरह सलूक किया जाता रहा । उनके वाहन की डिकी से लेकर नागरिकों के जेब की तलाशी तक ली गई । इटारसी में आम नागरिकों को प्रताड़ित करने का ये सिलसिला लंबे समय से चल रहा है । बाजार में पार्किंग की यथोचित व्यवस्था नहीं है । जय स्तंभ पर यातायात पुलिस भी अब मौजूद नहीं रहती । पार्किंग की जगह न मिलने पर जब नागरिक मजबूरी में यहां वहां वाहन लगा देते हैं तो तफरीह करती यातायात पुलिस उनके वाहन की हवा निकालने में कसर नहीं करती । बाजार करने के बाद परिवार सहित लौटने पर अपने वाहन की स्थिति को देखने के पश्चात नागरिकों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा इसका आप अंदाज लगा सकते हैं क्योंकि तब उनके पास वाहन को धक्का लगाकर ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता । वे तो परेशान होते ही हैं साथ ही परेशान होता है उनका परिवार भी जिसमें शामिल रहते हैं महिलायें और बच्चे भी । अगर पुलिस प्रशासन यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति इतनी ही ईमानदार तो नगर पालिका के साथ तालमेल बिठाकर पहले पार्किंग को व्यवस्थित करें । बजाय किसी वाहन की हवा निकालने के उक्त नागरिक के लौटने पर उसका चालान काटा जाए । एस डी ओ पी साहब का ये बयान भी हास्यास्पद है कि पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है । तो क्या इटारसी का हर नागरिक शराब पीकर गाड़ी चला रहा है । फिर प्रश्न ये भी उठता है कि भाजपा युवा मोर्चे ने यातायात पुलिस द्वारा आम नागरिकों को परेशान किये जाने तथा उनसे अवैध वसूली की शिकायत क्या कर दी कि पुलिस नागरिकों के खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्रवाई पर उतर आई । युवा मोर्चे ने तो ज्ञापन देकर अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली इधर पुलिस द्वारा नागरिकों के साथ पहले से ज्यादा बदसलूकी होने लगी । उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया जाने लगा । युवा मोर्चे के पदाधिकारी अता पता लापता हैं । उनके द्वारा प्रस्तावित आंदोलन की भी हवा निकल गई । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे सक्रिय संगठनों ने तक चुप्पी साध ली है । काकू भाई ने भी मात्र एक बयान भर देकर अपना दामन बचा लिया । इसलिये भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन भी मौन है । वैसे भी उनकी सक्रियता कॉलेज कैम्पस तक ही सीमित रहती है । जबकि पुलिस की इस कार्रवाई से छात्र भी प्रभावित हो रहे हैं । न केवल छात्र अपितु वरिष्ठ नागरिक भी प्रभावित होते हैं । रही नए यातायात प्रभारी की बात तो जब भी कोई नया यातायात प्रभारी आता है तब यही सब होता है । हमारे लिए ये कोई नई बात नहीं है । ऐसे में नागरिकों को याद आते हैं पूर्व यातायात प्रभारी विजय शंकर द्विवेदी जिन्होंने नागरिकों से यातायात के नियमों का कठोरता से पालन तो कराया परंतु किसी से कभी कोई बदसलूकी नहीं की । यही वजह थी कि उन्हें शासन प्रशासन द्वारा बार-बार सम्मानित किया जाता रहा । इतना ही नहीं नागरिकों के मन में आज भी उनके प्रति सम्मान का भाव है । आज भी नागरिक सम्मान के साथ उनका नाम लेते हैं । उनको याद करते हैं । जहां तक पुलिस प्रशासन का सवाल है । वह खुद पहले अपने आप को भी देखे । उनकी खुद की गाड़ियां व्यस्ततम मार्गों पर खड़ी मिल जायेंगीं । कितने पुलिस वाले हेलमेट पहनते हैं ? कितनी ही बार एक मोटर सायकल पर दो से अधिक पुलिस वाले बैठे नजर आते हैं । कितनी ही बाईक ऐसी हैं जिन पर लिखा तो ‘ पुलिस ‘ होता है लेकिन चला रहा कोई और होता है । ऐसे वाहनों को हर तरह की छूट रहती है । उनकी जांच कोई ” माई का लाल ” नहीं कर सकता । कितने पुलिस वाले ऐसे हैं जिनके पास वाहन के सम्पूर्ण कागजात् होते हैं ? नवीन एजेंसी से लेकर थाने तक खड़े ओव्हर लोडिंग ट्रक पुलिस को नज़र नहीं आते । नागरिकों को परेशान करने की अपेक्षा यातायात पुलिस पहले टैगोर स्कूल चौराहा , कॉन्वेंट स्कूल तिराहा , रेल्वे स्टेशन से सूरजगंज चौराहे तक , भारतीय स्टेट बैंक से भारत टॉकीज तक और भारतीय स्टेट बैंक से ही सेन्ट्रल बैंक तक की पार्किंग व्यवस्था को नगरपालिका के सहयोग से ठीक किये जाने के लिए प्रयास करे तो बेहतर होगा । शहर को राहत मिलेगी । नागरिकों को आने – जाने में आसानी होगी । पिछले दिनों पुलिस मुख्यालय , भोपाल में अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक अनुराधा शंकर सिंह तथा एक कार्यक्रम में सहायक पुलिस महानिरीक्षक मलय जैन से भेंट के दौरान मैंने उनका ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया है । खैर । इस सबके बावजूद मैं जानता हूं कि समय आने पर पुलिस मुझे भी परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी परन्तु मैं इस सबकी परवाह नहीं करता । हालांकि न मेरे पीछे भारतीय जनता युवा मोर्चा है और न ही भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन । न मुझे किसी की जरूरत है । मैं हमेशा आम नागरिकों के हित की बात करता हूं और करता रहूंगा । फिर परिणाम चाहे जो कुछ भी हो । अब जबकि उमेश द्विवेदी नये एस डी ओ पी के रूप में थाने में अपनी आमद देंगे तो उनसे उम्मीदें बढ़ना स्वभाविक है क्योंकि वे शहर की फितरत से अच्छी तरह वाकिफ हैं । उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में न केवल इटारसी की कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखा बल्कि नागरिकों के सम्मान को भी बनाये रखा । आशा है अपनी प्राथमिकताएं तय करते समय वे शहर की यातायात व्यवस्था को सबसे ऊपर रखेंगे । बस किसी नागरिक के साथ बदसलूकी न हो । किसी वरिष्ठ नागरिक के साथ अपराधी की भांति व्यवहार न किया जाए । महिलाओं का आत्म सम्मान बना रहे । कोई बच्चा परेशान न हो । इटारसी के नागरिकों की बस इतनी ही अपेक्षा है जो हर समय पुलिस प्रशासन को सहयोग के लिए तैयार रहते हैं ।

लेख – विनोद कुशवाहा
संपादक
मानसरोवर
इटारसी .

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