प्रयागराज से शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’ की गजल

गजल

फूल और शूल का रिश्ता महज़ ज़ज्बात का है,
बिखर जाता है पल में फर्क बस एहसास का है,

न पूछो कब दिया? कितना दिया?किसने दिया है?
अग़रचे मामला इससे जुड़ा ख़ैरात का है,

सियासत याद रखती है मुनाफे की वो बातें,
जहाँ पर वाकया कोई जुड़ा गुजरात का है,

परेशां हैं बहुत वे लोग अपने ही कफ़स में,
सुना है मामला ये सिर्फ बंदर बाँट का है,

फटा कुर्ता दिखाना भी सियासी दाँव उनका,
फटे कुर्ते के पीछे मामला भी ठाठ का है,

वो कहते फिर रहे हैं सूर्य जैसा कुछ नहीं है?
फक़त है चाँद सबकुछ, वही राजा रात का है,

कहीं गफ़लत में फिर से भूल कोई कर न बैठें,
शराफ़त चुप है ‘गुंजन’ डर भला इस बात का है,

– शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’
प्रयागराज
(स्वरचित)

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1 Comment

  1. आदरणीय देवेन्द्र सोनी जी को हृदयतल से आभार संग नमन ।मेरी रचना को युवा प्रवर्तक में स्थान और सम्मान के लिए हृदय से आभार आपका ।

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