नवीन कुमार ‘नवेंदु’ ,सिमडेगा (झारखंड) की कविता- नहीं तो पाँच वर्ष पडे़गा पछताना

नहीं तो पाँच वर्ष पडे़गा पछताना

कौन कर सकता देश का भला ,
अच्छी तरह कर ले तू पहचान ;
‘मत’ में निहित है जन -कल्याण,
शुभ कार्य है लोकतंत्र में मतदान।

वोट माँग रहे कितने उम्मीदवार,
अच्छा-बुरा सोच समझकर जान;
जन गण का करे हृदय से सम्मान,
उसके पक्ष में कर पावन मतदान ।

कितने आते माथा टेकने तेरे द्वार,
झूठे वादे कसमें खा जताते प्यार;
पाँच साल में आता मौका एकबार
मतदान करना बनकर समझदार।

सुन रे!भैया,सुन री ! बहना ,
काम काज का छोड़ बहाना;
मतदान करने तुम जरूर जाना ,
नहीं तो पाँच वर्ष पड़ेगा पछताना।
(स्वचरित/मौलिक)

— नवीन कुमार ‘नवेंदु’
बानो ,सिमडेगा (झारखंड)

Please follow and like us:
0

10 Comments

  1. उत्साहवर्धक एवं प्रेरणादायक कविता है सर् जी। इसी प्रकार जनताओं के मन मे उत्साह एवम प्रेरणा की दीपक प्रज्ज्वलित करते रहिए, ताकि एक स्वच्छ परंपरा के साथ नव भारत का निर्माण हो। धन्यबाद !

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*