Devendra Soni May 23, 2020

    धंधा न पगार, ब्याज मे छुट की दरकार

लाँकडाउन के 3 माह होने को आए है कोरोना महामारी ने भारतीय अर्थ व्यवस्था को गहरा प्रभावित किया है इसने समाज के सभी वर्ग की अर्थव्यवस्था को बिगाड़कर रख दिया है निम्न आय वर्ग तो इस संकट से प्रभावित हूआ ही है मध्यम आय वर्ग की माली हालत भी खराब हो गयी है कामकाज व्यापार व्यवसाय स्कुल कालेज यातायात सब बन्द पडे है इस दौरान साधारण नौकरीपेशा लोगो को मासिक वेतन तक नही मिला है जिसके परिणाम स्वरुप उसकी आर्थिक स्थित खराब हो गयी है ऐसे मे आरबीआई ने लोन की किस्त चुकानें की समय सीमा तो बढा दी किन्तू मध्यम आय वर्ग को बेंक लोन मे ब्याज से छुट नही दी गयी ब्याज की छुट इस वर्ग के लिये राहत का असली निर्णय होगा।
एक जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था मे यह आवश्यक भी है की नागरिकों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के प्रयासो मे बेंक ऋणो का सहारा लेने वाले समाज के मध्यम आय वर्ग को लोन की किश्त के साथ ब्याज की राशी मे छुट देकर वास्तविक राहत प्रदान की जाए।
सामान्यजन अपने जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिये व्यापार व्यवसाय के लिये कर्ज लेता है,अच्छा जीने के लिये मकान निर्माण हेतू कर्ज लेता है, अपना एव बच्चो का भविष्य सुरक्षित करने के लिये बच्चो की उच्च शिक्षा के लिये कर्ज लेता है, वह अपने जीवन की गति बढाने के लिये कार या वाहन के लिये कर्ज लेता है और भी कई प्रकार के कर्ज आम व्यक्ति द्वारा लिये जाते है ऐसा कहने मे कोई शंका नही दिखती की आमजनता का जीवन कर्ज से घिरा हूआ है जिसके पाटने मे उसकी सारी उर्जा खर्च होती है सामाजिक रुप से आगे बढने की प्रतिस्पर्धा ने कर्ज लेने की प्रवृत्ति को भी बढावा दिया है बेंको द्वारा लोन की प्रक्रिया को सरल करने से आमजन का जीवन आसान भी हूआ है।
बेंक से लिये गए कर्जे का मासिक ब्याज किश्तो मे मिली छुट के बाद अदा करना होगा आरबीआई द्वारा अगस्त माह तक बेंक की किश्त भरने की राहत तो दी गयी परंतु इस विपरित समय मे जब एक मध्यम आय वर्ग के व्यक्ति के सामने आर्थिक संकट खडा हो गया हो इस संकट से शायद ही कोई बच पाया हो एक जनकल्याणकारी सरकार का नैतिक दायित्व भी है की वह अपनी जनता के आर्थिक हितो का ध्यान रखे और बेंक ऋण के ब्याज मे भी छुट पर विचार करे आमतौर पर हमारी सरकारो द्वारा हर भारतीय के मकान निर्माण के सपने को साकार किये जाने के लिये होम लोन की व्यवस्थाओ को आसान भी किया गया है जिससे जनसंख्या का एक बहुत बडा वर्ग लोन की तरफ आकर्षित हूआ है।
शिक्षा का लोन भी आसान हो गया है होटल व्यवसायी अजय कानूनगो ने अपनी बेटी को फैशन डिजाइनर के कोर्स के लिये एजुकेशन लोन लिया है 3 माह से काम काज बन्द है जरुरी खर्चे जारी है ऐसे मे लोन की किश्त के समय ब्याज तो चुकाना ही होगा नही चुकाने पर ब्याज पर ब्याज लग जाएगा।
शैलेश जोशी पेशे से एडवोकेट है उन्होने मकान निर्माण के लिये होम लोन ले रखा है लाँकडाउन मे काम काज बन्द है ब्याज और किश्त का भार सर पर बरकरार है स्थिति कब तक सामान्य होती है कहा नही जा सकता है।
सरकार आर्थिक संकट को पटरी पर लाने के लिये लाँकडाउन को कुछ शर्तो के साथ खोल तो रही है किन्तू यह फिलहाल सम्भव नही दिखता की जल्द कामकाज पूर्व भांति शुरु हो सके ऐसे मे मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो सकती है।
इस मामले मे हरियाणा सरकार ने घोषणा की है की है की एजुकेशन लोन के ब्याज की कुछ राशी वहन करेगी यह एक राहत भरा फैसला माना जा सकता है लाँकडाउन के बाद जब न धंधा है न पगार तो ब्याज मे छुट की दरकार मध्यम वर्ग के ऋणधारको के लिये बेहद जरुरी है।
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नरेंद्र तिवारी
7,शंकरगली मोतीबाग सेंधवा जिला बड़वानी म प्र
मोबा-9425089251

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