Devendra Soni May 22, 2020

स्वदेशी (दो कुण्डलियां)

(1)
संकट के इस काल में, करो फैंसला आप।
मंत्र स्वदेशी का हमें, नित करना है जाप।।
नित करना है जाप, वस्तू घरेलू लेंगे।
त्याग विदेशी माल, अंगूठा उसको देंगे।।
कहें “कमल” कविराय, समय की गति को जानो।
जो संकट में साथ, उसी को अपना मानो।।

(2)

बापू सिखला के गये, हमें स्वदेशी मंत्र।
इसको जप कर काटिये, सारे तुम षड़यंत्र।।
सारे तुम षड़यंत्र, स्वदेशी को अपनाओ।
मिले विदेशी माल, नजर से दूर हटाओ।।
कहें “कमल” कविराय, देश की शान बढायें।
त्याग विदेशी वस्तु, स्वदेशी गले लगायें।।

डॉ. कमल भारद्वाज
अम्बाह, मुरैना, म. प्र.
मोबाईल : 9826587936

11 thoughts on “अम्बाह,मुरैना से डॉ कमल भारद्वाज की स्वदेशी पर कुण्डलिया

  1. बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय देवेन्द्र सोनी जी।

    1. संगम जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, आभार।🙏🌹🙏

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय गुर्जर साहब।🌹🙏🌹

  2. बहुत अच्छी रचनाएं हैं स्वदेश का रुपया दे श में हो

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद नन्द किशोर गुप्ता जी। 🌹🌹🌹🙏🌹🌹🙏

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