Devendra Soni May 19, 2020

    नही लिखना चाहता कविता

मैं नहीं लिखना चाहता
आज कोई कविता

सृष्टि के जिस काल-खंड में
भूख से बिलखते बच्चे
चलते चलते पैदल मर गए हों
कोई प्रसवा डूब हो गई हो
सरे राह दर्द के समुंदर में
और सड़क पर पड़ा हो नवजीवन

शक और संदेह से भरे आदमी को
अपने ही लगने लगे हों शत्रु सम
चल रही हों हजारों की
रूकती रूकती सांसें
बिछ रही हो लाशें
और दूभर हो गए हों चार कंधे
शमशान तक ले जाने के लिए
तब ऐसे में कैसे कोई
लिख सकता है कविता

आज मैं लिखना चाहता हूँ
ऐसा दर्द, ऐसी वेदना
जो पिघला दे उन तानाशाहों के हृदय
जो मौत का सामान बनाकर
भेज रहे हैं दुनिया में
कि रहे उनका वर्चस्व कायम
लाशों के ढेर पर

लिखना चाहता हूँ
उन स्वार्थी अवसरवादी
राजनेताओं के विरुद्ध
जो इस कठिन समय को भी
करके ड्रामेबाजी,
भुनाना चाहते हैं सत्ता के लिए
लिखना चाहता हूँ संवेदनाएं
जो बन जाएं रोटियाँ भूखों के लिए
मैं आज नहीं लिखना चाहता कोई कविता

गोकुल सोनी
भोपाल।

6 thoughts on “भोपाल से गोकुल सोनी की रचना – नही लिखना चाहता कविता

  1. रचनाकारों को प्रकाशित, प्रसारित करके ‘युवा प्रवर्तक’ हिंदी साहित्य की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आज के कठिन कोरोना-काल में आवश्यक है कि हम सभी साहित्य-प्रेमीजन इन प्रयासों को प्रोत्साहित करें,लाइक, कमेंट, और सब्सक्राइब करके, अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, और विभिन्न साहित्यकारों की रचनाओं का आनंद भी लें।
    आभार देवेंद्र सोनी जी।

  2. बहुत ही शानदार कविता. मजदूरों की व्यथा और राजनीति पर कटाक्ष का सटीक वर्णन. बेहतरीन कविता के लिए सोनी जी को बहुत बहुत बधाई.

  3. सम सामयिक दिल को छूने वाली रचना सोनी जी।
    क्या हम भी लिख सकते है ?

    1. आपकी रचनाओं का भी स्वागत है। हमारे व्हाट्सएप पर भेज दीजिए। 9111460478

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