Devendra Soni March 27, 2020

*अश्रु*

क्रंदन में अश्रु,
अट्टहास में अश्रु
उदासी में अश्रु,
मुस्कान में अश्रु
जीवन में अश्रु,
मृत्यु में अश्रु
अमूल्य है अश्रु,
मोल कर सको वह नहीं है अश्रु |

अश्रु तू सहेली है ,
अश्रु तू परछाई है |

कभी दुख में अश्रु ,कभी खुशी की अधिकता में अश्रु,
कुछ पाने में अश्रु ,कुछ खोने में अश्रु ,
कभी भूख में अश्रु ,कभी प्यास में अश्रु ,
कभी चाह में अश्रु कभी अनचाहे अश्रु
कभी दिखे अश्रु ,कभी अनदेखे अश्रु |

कभी भीड़ में अश्रु ,कभी सन्नाटे में अश्रु ,
कभी गैरों के लिए अश्रु, कभी स्वयं के लिए अश्रु
कभी सिरहाने रखे तकिए में अश्रु,
कभी अमूर्त अश्रु ,कभी मूर्त अश्रु|

शिशु की निश्छलता में अश्रु ,
कभी नव युवा के हुंकार में अश्रु,
कभी प्रौढ़ में अश्रु , कभी वृद्धों में अश्रु
कभी कमीज की बांह में अश्रु,कभी आंचल में अश्रु |

कभी आंखों में अश्रु ,कभी ह्रदय में अश्रु,
प्रेम में अश्रु ,विरह में अश्रु
संवेदना में अश्रु ,
सहज सहर्ष संवाद में अश्रु |

कभी मोती-सी अश्रु ,कभी नदिया-सी अश्रु
कभी रह जाती अंदर ,कभी बन जाती समंदर |
कभी खामोश है अश्रु , कभी चीखती अश्रु ,
कभी कोमल है अश्रु ,कभी कठोर हैअश्रु |

अश्रु एक , पर अनुभूति अनेक

अश्रु तू पास है ,साथ है
अश्रु, तेरे रूप अनेक हैं|

( स्वरचित)
तारा कुमारी
रांची, झारखंड

19 thoughts on “रांची से तारा कुमारी की रचना -अश्रु

  1. collect all in one book….give it to publish….in the form of a book….your creations are very very beautiful….

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