Devendra Soni March 26, 2020

घर पर ही रहना

काव्य ने नहा कर जैसे ही बाहर कदम रखा तो,बाजू के कमरे से खाँसने की आवाज आयी ।अरे!यह तो दादा का कमरा है।

काव्य ने देखा,दादा बाहर जाने को तैयार हो रहे थे।काव्य ने पूछा,-“दादाजी,आप कल रात को भोजन में भी साथ न थे।।मम्मी ने कहा था कि आप हल्दी वाला दूध पीकर ही सो गये है।तबियत ठीक है न।अब कैसा लग रहा है?”

-“हांँ बेटा,कल सिर में बहुत दर्द था।अब ठीक है।”

-“अभी,कहाँ जा रहे है-?”काव्य बोला।
-“सुबह की सैर को जा रहा हूँ।साथी ईंतजार कर रहे होंगे।”

नहीं. नहीं. दादाजी।बगीचे आदि सब बंद है ।शहर मे पूरा लाक डाउन है।आपने टी.वी. पर नहीं देखा।एक बड़ी मुसीबत आयी है।”।

-“हां.बेटा,पर सेहत भी तो जरूरी है न।”

-“नहीं. दादा,अब स्थिति बदल गयी है।मम्मी-पापा भी घर से काम कर रहे है।मेरी भी छुट्टी है.तो हम सब घर पर ही समय बितायेंगे।आप मुझे कहानियांँ और पापा के बचपन की बात बताईयेगा।फिर लूडो,केरम खेलेंगे।”

दादा पोते की बात कैसे न मानते।उन्होंने कुरता पाजामा पहन लिया।टी.वी. पर खबरें देखी।सबने साथ में चाय-नाश्ता किया।

अब दादा पोता अपने रुम में आ गये।

काव्य ने पूछा,-“दादा इससे पहले भी कभी ऐसी मुसीबत आयी थी?”

दादा ने बताया -महामारी याँ तो खूब आयी।पहले चेचक,टीबी.फ्लू और अब प्लेग,ईन्फलूंजा,और स्वाईन फ्लयू जैसी बीमारियां आयी।पर, सरकार और जनता ने मिल कर इन संँकटों से बहादुरी से सामना किया।इस बार भी लड़ लेंगे।

-“इस बार क्या जरूरी एहतियात रखनी है,दादा जी-“काव्य ने पूछा।

दादा ने बताया, कि चूंकि यह एक वैश्विक बीमारी है.सारा विश्व इससे जूझ रहा है।अभी तक इसके इलाज के.लिये कोई टीका नहीं बना तो।अब एक ही तरीका है ,सोशल डिस्टेंस बनाये रखना है।घर पर ही रहना है।और सबके लिये प्रार्थना करनी है।

सावधान रहना ही इसका एक मात्र ईलाज है।

काव्य को बात समझ में आ गयी।अब वह फोन पर अपने दोस्तों को बता रहा था,-“घर पर ही रहना।”

*महेश राजा*,
वसंत 51/कालेज रोड़.
महासमुंद।छत्तीसगढ़।

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