Devendra Soni March 25, 2020

आदित्य!
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डूब चला सूरज फिर से
क्षितिज के अस्ताचल में सोने,
थका हार पसीने से लथपथ
चला डूबकर तपन को धोने !
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हाहाकार मचा धरती पर
हवा खौफ में भरती सासें,
पंख समेट बैठे हैं पाखी
करते ना कलरव ना बातें!
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थम गये पहियों का घुमना
रूक गये युवजन की तफरी,
थमा भीड़ भरा कोलाहल
चारों ओर निरवता पसरी !
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उतर रहा सूरज धरती पर
अंबर स्वर्णाभ छटा बिखेरे,
पट बंद करने की होड़ मची है
पहले कि छाया हो जाये घनेरे!
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आज दिवाकर ठान लिया है
अवरक्त किरण का जाल विछाने,
पराबैगनी आंखोँ की अग्नि से
विष राक्षस को मार भगाने!
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सावधान!पञ्चभूत जीवद्रव्यक
रक्तपिपासक दानव घूम रहा है,
भस्मासुर को जला भस्म करने
भस्मक बन भाष्कर ढूंढ रहा है!
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तुम रक्षी कोटर में छिप जाओ
तुम घर से बाहर नजर न आओ,
कुछ दिन रखो सामाजिक दूरी
ना हांथ मिलाओ- गले लगाओ!
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अंजनीकुमार’सुधाकर

1 thought on “बिलासपुर से अंजनी कुमार सुधाकर की रचना -आदित्य!

  1. सूर्य ही ऐसी प्रत्यक्ष शक्ति हैं जो प्राण को अर्जित करने व पञ्चभूत कलेवर को आरोग्य रखने में सीधा सहयोग करते हैं!

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