Devendra Soni March 25, 2020

मुश्किल बड़ी घड़ी है

मुश्किल बड़ी घड़ी है
संयम बनाये रखना
एक फ़ासला बनाकर
खुद को बचाये रखना

है जिन्दगी नियामत
असमय ये खो ना जाये
इस देश पर कोरोना
हावी ना होने पाये
ये वक्त कह रहा है
घर से नहीं निकलना

कुछ देर योगा करके
निज शक्ति को बढ़ाना
संकल्प से ही अपने
इस रोग को भगाना
हाथों को अपने साथी
कई बार धोते रहना

उनको नमन करें हम
सेवा में जो लगे हैं
सब कुछ भुला के अपना
दिन-रात जो जुटे हैं
रहकर सजग हमेशा
अफवाहों से भी बचना

मुश्किल बड़ी घड़ी है
संयम बनाये रखना

डॉ सुरंगमा यादव
असि0 प्रो 0
महामाया राजकीय महाविद्यालय महोना लखनऊ

5 thoughts on “महोना, लखनऊ से डॉ सुरंगमा यादव की रचना-मुश्किल बड़ी घड़ी है

  1. मेरी रचना को स्थान देने के लिए आदरणीय संपादक महोदय का हार्दिक आभार ।

  2. अत्यन्त भाव पूर्ण हृदय स्पर्शी एवम् समय के अनुसार सटीक ।

  3. वास्तव में वर्तमान समस्या का समाधान कविता अनुसार ही है ।
    अति सुन्दर रचना ।

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