Devendra Soni March 25, 2020

*राष्ट्रव्यापी पूर्ण बंद (लाॅकडाउन) के दौरान समय का सदुपयोग*

विश्व भर में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है जिसकी वजह से कई देशों की सीमाएँ सील कर दी गई हैं। कल से हमारे भारत देश में भी सभी राज्यों के सीमाएँ 21 दिन के लिये सील कर दी गई हैं।सबको अपने घर में रहने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ लोग इससे परेशान हैं।पहले से ही कई दिन से घर में हैं इसलिए ऊब गए हैं। ये नहीं सोचते कि यह ऐसा समय है कि उनके घर में रहने से न केवल बीमारी पर काबू पाया जा सकेगा…कई ऐसे काम हैं जिनके लिए हमेशा शिकायत रहती है कि समय ही नहीं है। अब तो समय ही समय है। अपने परिवार के साथ वक्त बताओ। पत्नी के साथ काम में सहयोग करो। बच्चों का भी फर्ज है कि घर के कामों में सहयोग करें। 
एक अकेली औरत घर के काम करती है। आजकल मेड का आना भी वर्जित है। मौसम में बदलाव हो रहा है। सर्दी वाले कपड़े रखने होते हैं तो गर्मियों वाले कपड़े निकालने होते हैं… जो अपने आपमें एक बात बड़ा काम है। घर में और भी अनेकों ऐसे काम हैं, जिन्हें करने के लिए समय चाहिए और किसी की मदद भी चाहिए। जैसे:- सर्दियों के बिस्तर रखना और गर्मियों के कपड़े निकालना। यह भी अपने आपमें एक बहुत बड़ा काम है। बड़े बच्चे और पुरुष इस काम में महिलाओं की सहायता कर सकते हैं। घर में लगे जालों को झाड़ सकते हैं।  बहुत जरूरी है कि रोजाना सुबह शाम घर में ही रहकर योग और प्राणायाम किया जाए… जो रोजाना की आपा-धापी में नहीं हो पाता।छोटे बच्चे बड़े बूढ़ों के पास बैठ कर दादी नानी की कहानियाँ सुनें, जिससे कि उनका भी अकेलापन दूर हो सके।
कुछ नया सीखा जाए। किसी- किसी को पढ़ने का बहुत शौक होता है किंतु समय नहीं मिल पाता। अब तो समय ही समय है। अपने पढ़ने के शौक को पूरा कर सकते हो। जो बिल्कुल अकेले रहते हैं, वे तो यह काम बड़े आराम से कर सकते हैं।जो बहुत समय से सोच रहे हैं कि कोई उपन्यास लिखा जाए, उनके लिए यह बड़ा अच्छा मौका है क्योंकि किसी का आना- जाना वर्जित है, तो समय ही समय है। 
पहले के लोग अपने आत्मिक बल को बढ़ाने के लिए एकांतवास करते थे। उन्हें तो कभी एकान्तवास ने नहीं सताया। बड़े-बड़े आविष्कार एकांत में रहकर ही हुए हैं। सबसे बड़ी बात… आज से हमारा नव संवत्सर शुरू हो रहा है। हम सभी माता की पूजा करते हैं। कोई रामायण का पाठ करता है तो कोई दुर्गा सप्तशती का। इन नवरात्रों में मौका है कि सारे बच्चों को बैठाकर बारी- बारी रामायण का पठन- पाठन किया जाए।मात्र 6 दिन में ही रामायण पूरी हो जाएगी।भारत में  रामायण लगभग हर घर में होती है… चाहे वह रामचरितमानस हो या बाल्मीकि रामायण या राधेश्याम की रामायण या अन्य किसी की। यह मौका है समय का सदुपयोग का और बच्चों में संस्कार भरने का… क्योंकि *वैसे तो आजकल के बच्चे रामायण और गीता पढ़ते ही नहीं है, किंतु नवरात्रों के बहाने और *लाॅकडाउन के कारण कहीं जा नहीं पा रहे।माॅल,होटल,छविगृह,धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल बंद हैं।यातायात के साधनों पर प्रतिबंध है।लोकल बाजार में भी पाँच से अधिक लोग कहीं जरूरत का सामान लाने के लिये ही निकल सकते हैं और वह भी पैदल।बाईक पर भी प्रतिबंध है।मटरगश्ती करने वाले तो बेहद बोर हो रहे होंगे।कम से कम इसी बहाने पढ़ेंगे।* पढ़ते समय बच्चों के वीडियो बनाओगे तो उन्हें और भी अच्छा लगेगा और वे इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।
तुलसीकृत रामायण मैथिली भाषा में लिखी हुई है जिसे पढ़ने में बच्चों को बोरियत महसूस हो सकती है। किंतु नीचे हिंदी में भी उसके अर्थ बताए गए हैं।जरूरी नहीं है कि दोहे और चौपाई भी पढ़ी जाएँ।हिन्दी या मातृभाषा में लिखा हुआ पढ़ें।गीता और रामायण का कई भाषाओं में अनुवाद है।रामायण जैसा ग्रन्थ पढ़कर बच्चों को पता लगेगा कि बड़ों से और छोटों से कैसे बोलना होता है।
रोजाना 5 मिनट सभी मिलकर महामृत्युंजय का जाप करें।
पाँच मिनट पंचाक्षर जाप करें।
पाँच मिनट गायत्री मंत्र बोलें। उससे घर में एक सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी। 
माताओं के पास कम समय होता है क्योंकि उनकी सारी जिंदगी घर के कामों में ही बीत जाती है।आजकल छुट्टियाँ होने के कारण बच्चों की माँँग भी बहुत बढ़ गई है। खाली हैं तो सारा दिन भूख सताती रहती है। बेवक्त सोते हैं, बेवक्त जागते हैं, बेवक्त नहाते हैं और बेवक्त खाते हैं। सभी के हिस्से में दिन में उम्र के हिसाब से कुछ- कुछ काम लगाए जाएँ तो सबको औरतों के काम की अहमियत का पता लगेगा। *दो-तीन दिन पुरुष घर की स्त्रियों को घर के कामों से पूरी छुट्टी दे दें ताकि वे भी अपने शौक के काम कर सकें। घर के सारे काम… खाना बनाने से लेकर कपड़े धोना, बर्तन साफ करना, कपड़े सुखाना,बारिश होने पर कपड़े भीग न जायें,इसका ध्यान रखना,सूख जाने पर कपड़ों को उतारना व तह लगाना…उन्हें सही स्थान पर रखना जैसे सभी काम घर के बड़े बच्चे और पुरुष करें।*
*औरत को भी जिंदगी में थोड़ा आराम मिलना चाहिए क्योंकि उसे तो केवल अर्थी पर ही आराम मिलता है।* कम से कम इस खाली समय में बोर होने के बजाय माँँ, पत्नी को घर के काम से रिहाई दें। बड़े बच्चे… चाहे लड़की हो या लड़का… कॉलेज से छुट्टियाँ हो गई हैं,  सारा समय सोने में न बिता कर घर के कामों में सहायता करें। छोटे बहन भाइयों को पढ़ाएँ। 
अपने बचपन को याद करें और उन्हें लिखें। आम के आम और गुठलियों के दाम।अपने लिखे को देखकर आपको खुद एक सुखद अनुभूति होगी। गपशप भी खूब करें और चुपचाप उसकी रिकॉर्डिंग करें। बाद में सुनें तो बड़ा मजा आएगा। समय हँसते- हँसते कब बीत गया, पता भी नहीं चलेगा।
बस जरूरी यही है कि अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करें। समय को सोने में न गँवाकर कुछ रचनात्मक काम करें। माँ रसोई में काम करते- समय बच्चों से कहानियों की किताब पढ़कर सुनाने के लिए कह सकती है।व्हाट्सअप संदेश पढ़ कर सुनाने के लिये कह सकती है।बच्चों की वाचन क्षमता बढ़ेगी। 
खाली समय में सब लोग बैठकर ताली बजाते हुए भजन गा सकते हैं। गाना गा सकते हैं। जप कर सकते हैं।ध्यान कर सकते हैं। ध्यान में भी यह प्रतियोगिता रखें कि देखते हैं कौन कितनी देर ध्यान लगा सकता है। आल्थी-पाल्थी लगाकर, सहज आसन में बैठकर,घुटनों पर दोनों हाथ रख कर 15 मिनट बैठें और मंत्र जाप करें। उस दौरान कितनी भी खुजली मचे,खुजलाने की कोशिश न करें।बिना हिले-डुले जाप करते रहें। यह अपने आपमें ध्यान है।
न जाने ऐसे कितने ही काम हैं, जिनको इन दिनों पूरा कर सकते हैं जो समय के अभाव में महीनों से क्या, सालों से लटक रहे हैं। ध्यान रहे कि इस दौरान न तो किसी के घर जाएँ और न ही अपने घर किसी को आमंत्रित करें।
ऋषि मुनियों के बारे में सोचें जो ऊँचे पहाड़ों पर एकांत में आश्रम बनाकर रहते थे और परीक्षण करते थे जिन्हें हम लोग यज्ञ करना कहते हैं।एकान्तवास में गुफाओं में रहकर लेखन कार्य करते थे। महाभारत जैसे महाग्रंथ को एकान्तवास में एक गुफा में रहकर ही लिखा गया था। गोपीचंद,भृतर्रि हरि और मछिन्दर नाथ  कितने वर्षों तक गुफा में रहे। हम तो किसी गुफा में नहीं रह रहे। हमारे पास मनोरंजन के लिये टी.वी है।टेप रिकॉर्डर व सीडी प्लेयर हैं। कंप्यूटर व मोबाइल भी हैं। मौका है कि अपने बच्चों से कंप्यूटर सीखें। 
फिर देखें कि…
आपको इस एकांतवास में भी कितना मजा आएगा। 
और महामारी पर..
बहुत जल्दी नियंत्रण पाया जाएगा।  
तब आपको…
यह लॉकडाउन नहीं सताएगा 
अतः आप सबसे निवेदन है कि इसमें सहयोग करें और अपने समय का सदुपयोग करें। धार्मिक ग्रंथों का नवरात्रों में पठन-पाठन करें। उसके बाद उपन्यास या पत्र पत्रिकाओं का अपनी रुचि के अनुसार अध्ययन कर सकते हैं। 
आपने कई दिन बेकार बिता दिये होंगे लेकिन अब इन 21 दिनों का सदुपयोग करेंगे तो कई जीवन बचा सकेंगे और इस बीमारी को हरा सकेंगे। सोच को सकारात्मक रखें। सावधानी रखें। अफवाह ना फैलाएँ। अच्छी पुस्तकों का पठन-पाठन करें और बच्चों को संस्कारित करें।

राधा गोयल,
विकासपुरी,न-दि

2 thoughts on “दिल्ली से राधा गोयल का लेख -राष्ट्रव्यापी पूर्ण बंद (लाॅकडाउन) के दौरान समय का सदुपयोग

  1. कोई रोड पर ना निकले पर कोपभवन समझ रोना-धोना ना करके,राधा दी की बताये सुझावों को दिनचर्या में शामिल कर जनहित में जारी कर्फ्यू को सफल बनाकर कोराना वायरस का नाम-ओ-निशाँ मिटायें।बहुत-बहुत बधाई, आदरणीया राधा दी।

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