Devendra Soni March 25, 2020

*कोरोना कोविड-19 वैश्विक संकट : संयम व सावधानी अपेक्षित*

जैसा कि मेरे 21 मार्च के आलेख में मैंने वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर इस बात का उल्लेख किया था कि हो सकता है 22 मार्च जनता कर्फ्यू के बाद कर्फ्यू को भी अधिक समय तक बढ़ाया जा सकता है और हमें मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि अन्य देशों की स्थति से इसका अनुमान लगाया जा सकता था, आज सरकार ने राष्ट्रहित व देश के जनमानस के हित में फिर एक बार अवधि को 14 अप्रैल तक के लिए बढ़ाने का समयानुरूप उचित व आवश्यक निर्णय लिया है, फिर क्या स्थिति होगी अभी कहना किसी के लिए भी कठिन होगा, आशंकाओं पर नहीं जाना चाहिए लेकिन अत्यधिक संयम की भी आवश्यकता है।

यदि हम सरकार/प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने में सफल होंगे तो स्थिति संभल सकती है, इसलिए संयम पूर्वक हम उनका पालन करें, यही वर्तमान में हमारा राष्ट्रीय कर्त्तव्य है, यही सपथ लेने का क्षण है, यही आज के परिपेक्ष में सच्ची राष्ट्रभक्ति भी होगी और समर्पण भी।

संकट से परंपिता ईश्वर उबारेंगे लेकिन वह भी हमारी सावधानी, समझ, अनुशासन व संयम के प्रतिफल, कहा गया है कि “God help those who helps himself”। हम उनकी अपेक्षा के अनुरूप अपना कर्त्तव्य पालन करेंगे तभी वे भी हमारी कार्यसिद्धि करेंगे।

इस बीच अनेक कठिनाईयां भी आयेंगी, हो सकता है खाद्य पदार्थों की आपूर्ति में भी कमियां हों, हालांकि सरकार उसके भरपूर इंतजाम में लगी हुई है, आश्वस्त भी किया गया है, लेकिन देशहित में कभी अचानक कुछ कठोर निर्णय भी लेने पड़ सकते हैं, हालांकि ऐसा होगा नहीं, लेकिन समय की मांग क्या होगी पता नहीं, लेकिन जो भी होगी हम तैयार हों, मजबूती से सरकार/प्रशासन के निर्णयों के साथ खड़े हों।
दूसरा समाज में आर्थिक स्थिति भी सबकी भिन्न-भिन्न है लेकिन हम सभी सामाजिक प्राणी हैं, संकटकाल में सब एक दूसरे के पूरक बनने का लघुत्तम प्रयास तो कर ही सकते हैं। हमने जो भी अर्जित किया है, सब देश व समाज से ही किया है, जन्म के साथ तो कोई नहीं लाता!

यहां पर मैं अपनी पुरानी रचित एक कविता ‘नर-जीवन’ की दो पंक्तियां साझा करना चाहूंगा, कि:-

“इस देश-धर्म-संस्कृति-समाज ने तुझपर जो उपकार किया,
अनुभाग अटूट रखा तुझ को, निज की अपनी पहचान दिया।
जय जन्मभूमि जननी तुझसे, माना कि उऋण ना हो सकते,
ऋण उपकारों का जीते जी कुछ कम कर जाना बाकी है।।”

इसलिए यदि अपने आसपास समाज के किसी भी कमजोर वर्ग को हमारी मदद आवश्यकता होती है और हम वह करने में सक्षम हैं तो मानवता के नाते करना चाहिए, यही इस संकट में एक पुण्य कार्य होगा, राष्ट्र का कार्य होगा। इसी प्रकार यदि कोई सेवाभावी व्यक्ति या सामाजिक संस्था या संगठन यह मानवीय कार्य कर रहा हो, और हमसे भी कुछ अपेक्षा करें तो हमें तत्पर रहना चाहिए।

यहां पर एक बात ध्यान रखने योग्य होगी कि कर्फ्यू की अवधि लंबी है, इसलिए हम अभी से खाद्य पदार्थों का उपयोग सीमित या यथा आवश्यक मात्रा में करेंगे तो उचित रहेगा, यदि परिस्थितिवश आपूर्ति में कहीं बाधा भी आती है या किसी अन्य को मदद की आवश्यकता हो तो बाद में परेशानी न हो, इसलिए अन्न जल का कण-कण अमूल्य है, संकट के समय आवश्यकता से अधिक उपयोग-अर्थात् उसकी बर्बादी भी पाप होगा।

हम सभी 14 अप्रैल तक बाहर न निकलें (उसके बाद भी सरकार के दिशा-निर्देशों की प्रतीक्षा व अनुमति मिलने पर ही निकलें)। घर में ही रहकर अपना व अपने परिवार का ध्यान रखें, स्वच्छता रखें, हाथ बार बार साबुन से बीस सेकेंड+ तक धोते रहें।
नव-वर्ष वि.सं. २०७७ प्रारंभ हो गया है, माता के नवरात्र प्रारंभ हो गये हैं, घर पर ही भजन पूजन करें। संकटकाल में मंदिर दर्शन जाना भी उचित नहीं होगा, संभवतः इसीलिए हमारी संस्कृति में घरों में भी देव-स्थान की प्रथा बनी होगी, सर्वव्यापी, सर्व शक्तिमान परमेश्वर की अराधना घर से ही हम करें, राष्ट्र-देव का सम्मान ही देव पूजा होगी।

साथ ही साथ इस आपदा के समय अपनी जान व परिवार की चिंता किए बिना देश को अपनी अद्वितीय सेवाएं समर्पित कर रहे हैं उन कर्मवीर, राष्ट्ररक्षक – चिकित्सक/ स्वास्थ्यकर्मी, सेना/ पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, मीडियाकर्मी, आपूर्तिकर्ता वर्ग एवं राष्ट्रहित की चिंता लिये हुए विभिन्न सेवा क्षेत्रों में लगे हुए भद्रजनों के प्रति कृतज्ञता अर्पित करते हुए परंपिता ईश्वर से उनके सपरिवार सर्वत्र कल्याण हेतु मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूं।

“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”

नवीन जोशी ‘नवल’
दिल्ली

8 thoughts on “बुराड़ी,दिल्ली से नवीन जोशी नवल का लेख -कोरोना कोविड-19 वैश्विक संकट : संयम व सावधानी अपेक्षित

  1. आलेख को स्थान देने के लिए प्रधान संपादक श्रद्धेय देवेंद्र सोनी जी सहित उनकी समस्त सम्मानित टीम का सहृदय आभार। यदि मेरे इस लेख से विश्व भर में मात्र एक व्यक्ति को भी प्रेरित करने में सफल हो गया तो यह मेरा राष्ट्रदेव के चरणों में एक पुष्प अर्पित होगा, मैं स्वयं को धन्य समझूंगा।

  2. बहुत उत्तम सोच व सुझाव मान्यवर, जय हो..

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