Devendra Soni February 26, 2020

अनमोल पल

एक साथ निभाना बाकी है
धीरे चल जिंदगी एक ख्वाब अधूरा बाकी है
एक साथ निभाना बाकी है
कुछ रूठ गए हैं यूं हमसे उनको मनाना बाकी है
एक साथ निभाना बाकी है।

वह अनमोल पल जब हमने साथ गुजारी रातें
हर उस पल का हिसाब चुकाना बाकी है
आपकी सोहबत में निखर गए वह पल
हर पल को मोती सा सहेजा है मैंने
बड़ा अद्भुत अलौकिक था वह पल
हंसता हुआ सा सुनहरा सा कल हर वह पल
साथ निभाना बाकी है एक ख्वाब अधूरा बाकी है।

जो गुजरे थे बाहों के घेरे में 
आज गुजर गया वह पल
मुड़कर ना देखती मैं पीछे कभी
एक साथ निभाना बाकी है
एक ख्वाब अधूरा बाकी है

वह गंगा की आरती मंदिर का घंटा
वह राम नारायण कृष्ण बल
गंगा का दिया गंगा की आरती
एक साथ निभाना बाकी है एक दर्द पुराना बाकी है

बाहों के घेरे थे हवा की मध्यम बयार
बहुत अद्भुत अलौकिक वे थे पल
पल हर पल गुजरे जो तेरी बाहों मैं यार
बहुत अनमोल थी मैं
एक साथ निभाना बाकी है
धीरज से धीरज तक एक साथ निभाना बाकी है
ख्वाब  पुराना  बाकी है
हक है मुझे उन रस्मों पर जो तेरे साथ निभाना बाकी है एक साथ पुराना बाकी है एक प्यार अधूरा बाकी है।

मुंबई से पूनम पाल

22 thoughts on “मुम्बई से पूनम पाल की रचना -अनमोल पल

Leave a comment.

Your email address will not be published. Required fields are marked*