Devendra Soni February 15, 2020

मनुजता

अगर हम मनुजता नही सीख पाए
तो जीवन का मक़सद अधूरा रहेगा

सफ़र चाँद तारों का करना है हमको
धरा को सुघर साफ़ रखना है हमको
मगर फ़र्ज़ से गर विमुख हो गए तो
सपन सृष्टि का सब अधूरा रहेगा

चलो रीति ऐसी जहाँ में चलायें
ज़माने से सारी विषमता मिटायें
तड़पता अगर भूख से कोई दिल है
तरक़्क़ी का मक़सद अधूरा रहेगा

क़ुदरत ने सबको मनुज ही बनाया
उसे हमने हिंदू मुसलमा बताया
ये है भेद मिथ्या समझ गर न पाए
तो ईश्वर का आशय अधूरा रहेगा

चलो इल्म का दीप ऐसा जलायें
मिटे तम जहाँ से सभी मुस्कराएँ
अगर कामना विश्वहित की नहीं है
तो जन्नत का सपना अधूरा रहेगा

कभी क्रोध मद लोभ मन पे न छाए
लवों पे ख़ुशी की फ़सल लहलहाए
पड़ेंगे अगर लाले जग में अमन के
मनुजता का मक़सद अधूरा रहेगा

बचा लो धरा को विनष्टीकरण से
तथा संस्कारों को होते क्षरण से
करो कुछ जतन क्रुद्ध क़ुदरत न होये
सफ़र अपना वरना अधूरा रहेगा

रचनाकार
प्रोफ़ेसर आर एन सिंह
मनोविज्ञान विभाग
बी एच यू , वाराणसी , यू.पी.

1 thought on “वाराणसी से प्रो.आर एन सिंह की रचना – मनुजता

  1. बहुत सुंदर और सामयिक रचना। कवि को बहुत बहुत बधाई।

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