Devendra Soni February 15, 2020

बड़े शातिर सियासी लोग

शहीदों की चिताओं पर भी ,
रोटी सेंक लेते हैं।
बड़े शातिर सियासी लोग ,
गोटी फेंक लेते हैं।।
कहीं कोई लपक ना ले,
जो मुद्दा गर्म होता है।
गमों के बीच जनता का,
हृदय जब नर्म होता है।।
किसी माँ की हो सूनी गोद,
या खाली बाप का दिल हो।
ये केवल वोट की खातिर में,
घुटने टेक लेते हैं।।
शहीदों की चिताओं पर भी ,
रोटी सेंक लेते हैं।
बड़े शातिर सियासी लोग,
गोटी फेंक लेते हैं।।

किसी की माँग सूनी हो या,
साया सर से उठ जाए।
कोई रोए बिलख करके,
कहीं कोई जो समझाए।।
ये केवल भीड़ करने को ,
जगह पर उस पहुँच जाएं।
सभा हो शोक करने का,
मगर हँसते नजर आएं।।
ये अपनी शर्मों-हया को भी,
सस्ते बेच लेते हैं।
जहाँ हो स्वार्थ अपना ये तो,
मत्था टेक लेते हैं।।
शहीदों की चिताओं पर भी ,
रोटी सेंक लेते हैं।
बड़े शातिर सियासी लोग,
गोटी फेंक लेते हैं।।

अजय तिवारी “शिवदान”
हाबड़ा, पश्चिम बंगाल

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