Devendra Soni February 14, 2020

ग़ज़ल

दर्द होते हैं, आराम होते हैं,
तुमसे हमें कई काम होते हैं ! -1

हम डूब के भी प्यासे ही रहे,
वो इश्क़ था खारे पानी सा ! -2

ये जो उनसे ज़रा सी शिकायत हुई,
देखिये तो सही क्या मोहब्बत हुई ? -3

नशा हो कर भी हलाल होता है,
चाय का प्याला भी कमाल होता है ! -4

उसके बिक जाने का डर नहीं रहा,
वो मकान, जो अब घर नहीं रहा ! -5

सारे तावीज़ और हर दुआ बे-असर,
इश्क़ आसेब है, इश्क़ आसेब है ! -6

सालहासाल मुझसे वो मिलता रहा,
मेरे मन से कभी उसका मन न मिला ! -7

मुद्दत से दिल पे कोई दस्तक नहीं हुई,
शायद किराएदार ने कमरा बदल लिया ! -8

दुश्वारियाँ हैं लेकिन, है फ़िर भी ख़ूबसूरत,
काँटों के दरमियान है गुलाब ज़िन्दगी ! -9

वो हैं नहीं जाहिल कि जो मकतब नहीं गए,
पढ़-लिख के बेशऊर हैं, वो लोग हैं जाहिल ! -10

©® फिरोज़ खान अल्फ़ाज़
नागपुर प्रोपर औरंगाबाद बिहार
स0स0-9231/2017

1 thought on “नागपुर से फिरोज खान की ग़ज़ल

  1. आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं

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