Devendra Soni February 13, 2020

ग़ज़ल

जिंदगी

राज़ दिल के सभी को बताए हैं हम,
इश्क़ में चोट पे चोट खाए हैं हम,

इत्तला करना मुझको दवा गर मिले,
अभी ज़ख़्मों पे नमक लगाए हैं हम,

कभी हमनें किसी को न धोखा दिया,
धोखेबाजों को दिल में बसाए हैं हम,

बात ग़ैरों की होती तो क्या बात थी,
अपनों के जाल में फड़फड़ाए हैं हम l

जाने क्यूँ जल रहा है ज़माना ये यारों,
हारकर ही तो बस मुस्कुराए हैं हम,

मुफलसी में ही क्यूँ न कटे जिन्दगी,
जमीर बिकने से अपना बचाए हैं हम,

‘कुबेर’ चुप है मगर तुमसे बिछड़ा नहीं,
गए थे ही कब जो वापस आए हैं हम,

आर.कुबेर सैड कश्यप

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