Devendra Soni February 13, 2020

“बाल विवाह”

छोटी सी उम्र में,
बड़ी जिम्मेदारी दे दी,
तेरह साल के गुड्डे को,
दस बर्ष की गुड़िया प्यारी दे दी।
जिन्हें शादी का मतलब,
भी नहीं पता,
उन्हें रस्मों कसमों की जानकारी दे दी।
पढ़ने के कुछ बनने के सपने,
चुल्हे की अग्नि ने जला दिए,
मां-बाप की नसमझी ने,
गुड़िया को खून के आंसू रुला दिए।
छोटी सी गुड़िया,
फुदक-फुदक कर सारा काम करती,
किसी से कुछ न बोलती।
चुप रह कर सब सहन करती,
उसकी ख्वाहिशों को बाल विवाह ने स्वाहा किया।
ये बाल विवाह ही है,
जिसने उसका जीवन तबाह किया।

अंकिता जैन अवनी
अशोकनगर मप्र

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