Devendra Soni February 8, 2020

मेरी प्रीत

पाकर खोना खोकर पाना जीवन की यह रीत
क्या पाया क्या खो दिया यह तो कहो मन के मीत
जो पाया वही खोया यही है जग की रीत
चल कर गिरना गिरकर उठना यह है जग की रीत
खोकर मैंने देख लिया मेरे मन के मीत
उनको पाकर चहक उठी मेरी प्रीत
खोकर उनको तब यह जाना हारी मेरी प्रीत
क्या खोया क्या पालिया मेरे मन के मीत।

पूनम पाल मुम्बई

8 thoughts on “मुम्बई से पूनम पाल की रचना -मेरी प्रीत

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