Devendra Soni January 31, 2020

मेरी अधूरी ख्वाहिशे

आधी अधूरी तेरे मन की ख्वाहिश
पूरी होकर अधूरी सी ख्वाहिश
चंचल मन की परछाई सी ख्वाइश
यू हवाओं से बहती सी ख्वाहिश
सागर की लहरों में बैठी थी ख्वाहिश
आसमा के बाहों में सोई सी ख्वाहिश
ख्वाहिश का सफर कभी थकता नहीं
आधी अधूरी सी तेरे मन की यह ख्वाहिश
चंचल हवा सी बहती  सी ख्वाहिश
आधी अधूरी तेरे मन की यह ख्वाहिश
जीने की उम्मीद जगाती सी ख्वाहिश
किसी पराए को अपना बनाने की ख्वाहिश
हरमन में बैठी अधूरी सी ख्वाहिश
मन से  बंधी  मन की यह ख्वाहिश
पूरी हो जाए मन की ख्वाहिश।

मुंबई से पूनम पाल

7 thoughts on “मुम्बई से पूनम पाल की रचना-मेरी अधूरी ख्वाहिशे

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