Devendra Soni January 8, 2020

* मैं और मेरी तन्हाई*

पता है मैं तन्हा अकेली खड़ी हूँ,
कोई हमसफर ना मेरे साथ है।

इन तन्हाइयों में भी कोई नहीं है,
अगर काश कोई मेरा हो जाता ।

ओ ऊपर वाले आपका क्या जाता है…
पता है मैं तन्हा अकेली खड़ी हूँ ।

मेरी किस्मत में किसी का साथ नहीं,
फिर भी मैं साथ ढूढ़ती हूँ ।

जाने कहां लेकर जाये मुकद्दर मुझे,
पता है मैं तन्हा अकेली खड़ी हूँ ।
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*पूनम पाल*
मुम्बई

5 thoughts on “मुम्बई से पूनम पाल की रचना – मैं और मेरी तन्हाई

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